बिजनौरः मंदिर में कुत्ते की परिक्रमा पर सामने आई डॉक्टरों की राय, ये वजह निकलकर आई सामने…

डिजिटल डेस्क- उत्तर प्रदेश के बिजनौर जनपद के नगीना क्षेत्र स्थित नंदपुर गांव में इन दिनों एक कुत्ते को लेकर जबरदस्त चर्चा बनी हुई है। गांव के एक मंदिर परिसर में पिछले कई दिनों से लगातार परिक्रमा कर रहे इस कुत्ते को कुछ लोग चमत्कार मान रहे हैं, तो कुछ इसे आस्था का प्रतीक। हालांकि, इस पूरे मामले में अब पशु चिकित्सकों का वर्जन सामने आया है, जिसने इस घटना को वैज्ञानिक नजरिए से समझाने की कोशिश की है। नंदपुर गांव के मंदिर में यह कुत्ता पिछले चार से पांच दिनों से लगातार एक ही दिशा में घूमता नजर आ रहा है। पहले तीन दिनों तक वह मंदिर में स्थापित भगवान हनुमान की मूर्ति की परिक्रमा करता रहा और उसके बाद मंदिर परिसर में मौजूद मां दुर्गा की मूर्ति के चारों ओर घूमने लगा। बताया जा रहा है कि कुत्ता लगभग 24 घंटे तक बिना रुके परिक्रमा करता रहा। गुरुवार को उसने दिन में करीब तीन घंटे का विश्राम जरूर किया, जिसके लिए ग्रामीणों ने मंदिर परिसर में एक गद्दा बिछा दिया।

कुत्ते को मान रहे दैवीय शक्ति, टेक रहे माथा

कुत्ते की इस हरकत को देखने के लिए मंदिर में तमाशबीनों और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुट रही है। हालात ऐसे हो गए हैं कि अब लोग कुत्ते के सामने ही माथा टेकने लगे हैं। कुछ ग्रामीणों का मानना है कि इस कुत्ते में किसी साधु या ऋषि-मुनि की आत्मा का वास है, जबकि कई लोग इसे भगवान भैरवनाथ का रूप मानकर पूजा-अर्चना कर रहे हैं। खासकर महिलाओं की बड़ी संख्या मंदिर पहुंच रही है और मंदिर के बाहर प्रसाद व खिलौनों की दुकानें भी सज गई हैं। ग्रामीण इस बात से भी हैरान हैं कि कुत्ता लगातार कई दिनों से बिना कुछ खाए-पिए परिक्रमा कर रहा है। उसके सामने दूध, रोटी और अन्य खाद्य सामग्री रखी गई, लेकिन उसने कुछ भी नहीं खाया। मंदिर में अब भजन-कीर्तन और पूजा-पाठ का सिलसिला लगातार जारी है।

डॉक्टरों ने किया कुत्ते का परीक्षण, बताई ये वजह

इस पूरे मामले को लेकर बिजनौर से पशु चिकित्सकों की एक टीम मंदिर पहुंची और कुत्ते की जांच की। पशु चिकित्सकों के अनुसार, कुत्ते के सिर में चोट लगने के कारण उसका न्यूरोलॉजिकल बैलेंस बिगड़ गया है। डॉक्टरों का कहना है कि कई बार सिर में गंभीर चोट लगने से जानवर एक ही दिशा में गोल-गोल घूमने लगते हैं, जिसे मेडिकल भाषा में ‘सर्कलिंग बिहेवियर’ कहा जाता है। यही वजह है कि कुत्ता लगातार परिक्रमा करता नजर आ रहा है। डॉक्टरों ने यह भी स्पष्ट किया कि यह कोई दैवीय या चमत्कारी घटना नहीं है, बल्कि एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या का संकेत है और कुत्ते को इलाज की जरूरत है। हालांकि, स्थानीय ग्रामीण डॉक्टरों की इस राय से सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि बिना खाए-पिए और बिना थके इतने दिनों तक घूमना किसी सामान्य बीमारी से संभव नहीं है और इसके पीछे जरूर कोई दैवीय शक्ति काम कर रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *