उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट , प्रदेश उत्तराखंड में मानव – वन्यजीव संघर्ष का शोर एक बार फिर से सुनाई देता हुआ नज़र आ रहा है,हालही में सचिवालय में राज्य वन्यजीव बोर्ड की बैठक में मुख्यमंत्री धामी ने भी इस गंभीर विषय पर चिंता जताते हुए अधिक प्रभावी कदम उठाने के निर्देश अधिकारियों को दिये है. जिसका अर्थ यह भी निकलकर सामने आता दिख रहा है. की प्रदेश में मानव वन्यजीव संघर्ष का सिलसिला अभी थमा नही है, लगातार वन्यजीवों के हमलों की घटनाओं में होती बढ़ोतरी काफी चिंताजनक है, सरकारी आकड़ो की बात करे तो प्रदेश उत्तराखंड में पिछले 25 वर्षों में बाघों, तेंदुओं, भालुओं और अन्य जानवरों के हमलों में 900 से अधिक लोग अपनी जान गवा चुके हैं. तो वही तेंदुओं के हमलों में 2,127 भालू के हमलों में 2,013 हाथियों के हमलों में 234 लोग घायल हुए है, यह भी कहा जा सकता है की एक बार फिर यह मानव – वन्यजीव संघर्ष आढ़े आता दिखाई दे रहा है, जिसको लेकर एक बार फिर 22वी० बैठक मंगलवार को मुख्यमंत्री धामी की अध्यक्षता में उत्तराखण्ड राज्य वन्यजीव बोर्ड द्वारा की गयी, जिसमे जानवरो के हमलों की बढ़ती घटनाओं के रोकथाम के लिए मुख्यमंत्री धामी द्वारा कड़े कदम उठाने के लिए भी निर्देशित किया गया है,साथ ही प्रभावी इलाकों में सतर्कता बढ़ाने, वन विभाग के साथ जिला प्रशासन द्वारा संयुक्त निगरानी व्यवस्था, नियमित पेट्रोलिंग, डिजिटल निगरानी, वार्निंग सिस्टम, वॉच टावर, फेंसिंग व अन्य सुरक्षात्मक उपाय अनिवार्य रूप से स्थापित करने के भी निर्देश है. वही स्कूल, आंगनबाड़ी, पैदल मार्गो के पास सुरक्षा प्रबंध मजबूत करने पर भी जोर डाला गया है, हालाकी पहले भी उत्तराखण्ड राज्य सरकार द्वारा अनेको उपाय व नीतियाँ मानव – वन्यजीव संघर्ष को रोकने – थामने के लिए बनाई गयी थी लेकिन उसके बाद भी बार बार योजनाये बनाने पर विपक्ष भी सरकार की सुरक्षा दृष्टि पर सवाल खड़े करता दिखाई दे रहा है जिसके चलते एक बार फिर इस विषय ने एक और राजनितिक मोड़ ले लिया है, पक्ष विपक्ष सभी अपने अपने दावे पेश करते नज़र आ रहे है,लेकिन धरातल पर इसका अभी कोई असर दिखता नजर नहीं आ रहा है.
उत्तराखंड में बारिश और बर्फबारी न होने से शीतकाल में ही वन क्षेत्र आग की चपेट में आ रहे हैं. नंदा देवी नेशनल पार्क के बाद उत्तरकाशी जिले के धरासू, मुखेम रेंज के जंगलों में लगातार आग की घटनाएं सामने आ रही हैं. इससे कई क्षेत्रों में जंगलों से धुएं का गुबार उठ रहे हैं. इससे वन विभाग की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठ रहे हैं.वही प्रदेश में वन्यजीव और मानव संघर्ष भी रोकने का नाम नहीं ले रहा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह सचेत है. कई बैठकें धामी अधिकारियों के साथ बैठक कर चुके है. लेकिन धरातल पर इसका कोई बड़ा असर देखने को अभी तक नहीं मिल पाया है.जिस पर लगतार भाजपा सरकार पर हमलावर है.
लगातार बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष के चलते मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में उत्तराखंड राज्य वन्यजीव बोर्ड की 22वीं बैठक आयोजित हुई. बैठक में सीएम धामी ने मानव-वन्यजीव संघर्ष के बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताई. साथ ही इसके नियंत्रण के लिए और ज्यादा प्रभावी कदम उठाए जाने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि भालू, गुलदार, बाघ और हाथी से संबंधित क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ाई जाए. वन विभाग एवं जिला प्रशासन की ओर से संयुक्त निगरानी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए.साथ ही मानव-वन्यजीव संघर्ष के चलते लगतार बढ़ती समस्या पर एक तरफ सरकार अधिकारियो के साथ कई बैठके कर चुकी है. वही अब विपक्षी दलों ने भी अब सरकार की बैठकों पूरी तरह से फेल बताया है.सरकार पर मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने में असमर्थ बताया
आपको बता दे इस बार दिसंबर और जनवरी माह में अब तक बारिश नहीं हुई है. ऐसे में नया संकट पैदा हो गया है,जिससे उच्च हिमालयी क्षेत्रों तक आग पहुंच रही है. वन विभाग की तैयारियां भी आधी अधूरी साबित हो रही हैं. अब तक आग बुझाने के इंतजामों का भी कुछ अता-पता नहीं है. वन विभाग के पास आग बुझाने के पर्याप्त संसाधन नहीं हैं.वही पहले से ही मानव वन्यजीव संघर्ष लगातार बढ़ रहा है. जो कि चिंता की बात है.अब पहाड़ों के बाद मैदानी क्षेत्रों में भी लगातार जंगली जानवरों का आतंक देखने को मिल रहा है।सवाल कुल मिला कर अब यही है कि राज्य सरकार ने भी बढ़ते मानव वन्यजीव संघर्ष को लेकर अपने हाथ खड़े कर लिए है.ऐसे में पहाड़ की भूगौलिक परस्थितियो से गुजर रहे ग्रमीण क्या ऐसे ही मानव वन्यजीव संघर्ष करते रहेंगे क्या सरकार मुआबजे को ही इसका समधान मान रही है.या सरकारे प्रशानिक तंत्र मुख दर्शक बने रहेंगे। इस का जवाब शायद अभी तक किसी के पास नहीं।