मकर संक्रांति 2026: स्नान-दान का महत्व, जानें शुभ मुहूर्त और सूर्य देव की पूजा विधि…

KNEWS DESK- सनातन धर्म में मकर संक्रांति का पर्व अत्यंत पुण्यदायी और विशेष माना जाता है। यह त्योहार सूर्य देव को समर्पित होता है और तब मनाया जाता है, जब सूर्य उत्तरायण होकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इस खगोलीय परिवर्तन के साथ ही शुभ कार्यों की शुरुआत मानी जाती है। आज देशभर में श्रद्धा और आस्था के साथ मकर संक्रांति का पर्व मनाया जा रहा है।

मकर संक्रांति के दिन पवित्र नदियों में स्नान, दान-पुण्य और सूर्य देव की आराधना का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक पूजा करने से भगवान सूर्य आरोग्यता, तेज और यश का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।

मकर संक्रांति का पुण्य काल और शुभ मुहूर्त

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्य के राशि परिवर्तन से आठ घंटे पूर्व और आठ घंटे बाद तक का समय पुण्य काल माना जाता है। आचार्यों के अनुसार सूर्य देव का मकर राशि में गोचर 14 जनवरी की रात को हो चुका है। इसी कारण मकर संक्रांति का पुण्य काल 14 जनवरी को दोपहर 3 बजकर 13 मिनट से प्रारंभ हो गया था, जो आज सुबह तक प्रभावी रहा। इसलिए मकर संक्रांति का पावन स्नान आज करना श्रेष्ठ माना गया है।

द्रिक पंचांग के अनुसार, आज ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 27 मिनट से 6 बजकर 21 मिनट तक रहा। इस समय में पवित्र नदियों या तीर्थ स्थलों पर स्नान करना अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है। वहीं, मकर संक्रांति का विशेष पुण्य काल सुबह 7 बजकर 15 मिनट से 8 बजे तक रहा। लगभग 45 मिनट के इस समय में स्नान और दान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि आज दोपहर 3 बजे तक गंगा सहित किसी भी पावन नदी में स्नान किया जा सकता है।

मकर संक्रांति पर सूर्य देव की पूजा विधि

प्रात:काल पवित्र नदी या जल से स्नान करें।

स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

तांबे के लोटे में गंगाजल या स्वच्छ जल लें।

उसमें लाल चंदन, लाल पुष्प और गुड़ मिलाएं।

सूर्य देव के मंत्रों का जाप करते हुए अर्घ्य अर्पित करें।

इसके बाद गायत्री मंत्र का पाठ करें।

आसन पर बैठकर सूर्य चालीसा का पाठ करें।

आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना भी विशेष शुभ माना जाता है।

अंत में विधिपूर्वक सूर्य देव की आरती करें।

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