डिजिटल डेस्क- बॉम्बे हाई कोर्ट ने देश के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले सैनिकों के परिवारों की मदद के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायालय ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को निर्देश दिया है कि जो 46.5 करोड़ रुपये ईडी ने अदालत में जमा किए थे, उस पर मिले ब्याज का 50 प्रतिशत ‘सशस्त्र बल युद्ध हताहत कल्याण कोष’ में ट्रांसफर किया जाए। यह आदेश जस्टिस ए एस गडकरी और आर आर भोंसले की बेंच ने दिया है।
मामला क्या है?
यह मामला शापूरजी पल्लोनजी एंड कंपनी लिमिटेड (एसपीसीएल) से जुड़ा है। 2019 में ईडी ने एक ट्रिब्यूनल आदेश के खिलाफ अपील दायर की थी, जिसमें एसपीसीएल की 141.50 करोड़ रुपये की संपत्ति की कुर्की रद्द कर दी गई थी। ईडी ने इसे चुनौती दी, लेकिन हाई कोर्ट ने ट्रिब्यूनल के आदेश को सही मानते हुए जमा की गई राशि को एसपीसीएल को वापस करने का निर्देश दिया। न्यायालय ने कहा कि हालांकि मूल राशि एसपीसीएल को लौटाई जा रही है, लेकिन जमा राशि पर मिले ब्याज का आधा हिस्सा सैनिकों के कल्याण के लिए इस्तेमाल करना न्यायोचित होगा। कोर्ट ने विशेष रूप से कहा, “सीमाओं की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर करने वाले सैनिकों और उनकी विधवाओं को न्याय मिलना चाहिए।” बॉम्बे हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जमा राशि पर जो ब्याज प्राप्त हुआ है, उसका आधा हिस्सा सशस्त्र बल युद्ध हताहत कल्याण कोष में डालकर सैनिकों के परिवारों की मदद की जाएगी। यह कदम उन सैनिकों के बलिदान और देशभक्ति के सम्मान में उठाया गया है, जिन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना देश की सेवा की।
विवाद की पृष्ठभूमि
मामला एसपीसीएल द्वारा नीलेश ठाकुर और उनकी कंपनियों को दिए गए पैसों से जुड़ा था। 2005 में अलीबाग और पेन में 900 एकड़ जमीन खरीदने के लिए 30 लाख रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से भुगतान किया गया था। ईडी का दावा था कि यह राशि सरकारी कर्मचारी ठाकुर के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले से जुड़ी हुई अपराध की कमाई थी। एसपीसीएल ने अदालत में दलील दी कि यह भुगतान जमीन खरीदने के एग्रीमेंट के तहत किया गया और इसे इनकम टैक्स रिकॉर्ड में एडवांस के रूप में दर्ज किया गया था। कंपनी ने यह भी कहा कि भुगतान के समय ठाकुर सरकारी ड्यूटी पर नहीं थे। जनवरी 2019 में ट्रिब्यूनल ने एसपीसीएल की दलील को स्वीकार किया और संपत्ति की कुर्की को रद्द कर दिया।
कोर्ट का आदेश और महत्व
23 दिसंबर 2025 को हाई कोर्ट ने अपना अंतिम आदेश दिया। कोर्ट ने ट्रिब्यूनल के फैसले को सही ठहराया और साथ ही यह निर्देश दिया कि ब्याज का आधा हिस्सा सैनिकों के कल्याण कोष में जाए। यह फैसला सैनिकों के बलिदान की सराहना और उनके परिवारों की मदद सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।