‘लेडी सिंघम’ भुवनेश्वरी सिंह का रिश्वतखोरी कांडः कानपुर से लेकर गाजियाबाद में रिश्वतखोरी के हो रहे चर्चे, दूसरी बार रिश्वतखोरी में हुई गिरफ्तार

डिजिटल डेस्क- कल तक पुलिस महकमे की शान बढ़ाने वाली ‘लेडी सिंघम’ भुवनेश्वरी सिंह आज सलाखों के पीछे हैं। गाजियाबाद पुलिस की स्टार महिला दारोगा, जिनके बहादुरी के किस्से पूरे प्रदेश में चर्चित थे, अब भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के चलते गिरफ्तार हुई हैं। मेरठ एंटी करप्शन टीम ने मंगलवार को भुवनेश्वरी को 45 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा। भुवनेश्वरी का यह मामला साहिबाबाद महिला रिपोर्टिंग चौकी से जुड़ा है। महिला दारोगा प्रभारी के रूप में तैनात थीं और दहेज उत्पीड़न के एक केस की जांच कर रही थीं। वृंदावन गार्डन निवासी रामपाल सैनी के बेटे गौरव पर उनकी पत्नी ने केस दर्ज कराया था। आरोप है कि भुवनेश्वरी ने केस में रामपाल के परिवार के अन्य सदस्यों को नामजद न करने और उन्हें राहत देने के बदले 1 लाख रुपये की रिश्वत मांगी। बाद में पीड़ित के मिन्नत करने पर सौदा घटकर 50 हजार रुपये तय हुआ। मंगलवार को जब पीड़ित 45 हजार रुपये लेकर चौकी पहुंचा, तब भुवनेश्वरी ने रकम अपनी मेज की दराज में रख ली। इसी बीच एंटी करप्शन टीम ने जाल बिछाकर कार्रवाई करते हुए दारोगा को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।

2022 में कानपुर में सेक्स रैकेट में ली थी 50 हजार की रिश्वत

यह भुवनेश्वरी का पहला रिश्वतकांड नहीं है। जानकारी के अनुसार, साल 2022 में कानपुर में तैनाती के दौरान भी उनका भ्रष्टाचार से नाता उजागर हुआ था। उस समय वह एक सेक्स रैकेट मामले में पकड़े गए व्यापारियों से 15 लाख रुपये की मांग करने के आरोप में पकड़ी गई थीं। हालांकि उस समय उन्हें 50 हजार रुपये की रिश्वत के साथ गिरफ्तार किया गया था। पुराने आरोपों के बावजूद भुवनेश्वरी फिर से फील्ड पोस्टिंग में लौट आईं, लेकिन अब एक बार फिर उनका रिश्वतखोरी कांड सामने आया है।

एनकाउंटर के बाद हुई प्रशंसा, कमिश्नर ने दिया था लेडी सिंघम का खिताब

भुवनेश्वरी की बहादुरी और प्रशंसा के दिन भी कुछ साल पहले शुरू हुए थे। 23 सितंबर को सिहानी गेट क्षेत्र में गाजियाबाद पुलिस की महिला टीम ने एक एनकाउंटर किया। उस दौरान घायल बदमाश को कंधे पर उठाकर अस्पताल ले जाते हुए उनकी फोटो वायरल हुई थी। उनके इस साहसिक कृत्य के लिए पुलिस कमिश्नर जे. रविंद्र गौड ने उन्हें ‘लेडी सिंघम’ का खिताब भी दिया था। मगर अब बहादुरी का यह तमगा रिश्वतखोरी की वजह से धूल में मिल गया है। एसीपी साहिबाबाद श्वेता यादव ने पुष्टि की कि भुवनेश्वरी के खिलाफ साहिबाबाद थाने में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत FIR दर्ज कर ली गई है।

जिसे पेश किया गया आइकन के तौर पर, उसने ही दागदार की विभाग की छवि

इस गिरफ्तारी से गाजियाबाद पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। जिस अधिकारी को पुलिस की छवि सुधारने के लिए ‘आइकन’ की तरह पेश किया गया था, उसने अब विभाग को भारी शर्मिंदगी में डाल दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि भुवनेश्वरी का यह मामला सिर्फ व्यक्तिगत भ्रष्टाचार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे पुलिस महकमे की विश्वसनीयता और विभागीय अनुशासन पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। पिछले कांडों की जानकारी और वर्तमान गिरफ्तारी को मिलाकर यह साफ होता है कि भुवनेश्वरी ने अब तक कम से कम दो प्रमुख मामलों में घूस ली है – 2022 का कानपुर कांड और 2026 का साहिबाबाद दहेज केस।

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