मकर संक्रांति पर क्यों है पतंग उड़ाने की परंपरा? जानिए इसके पीछे की धार्मिक और वैज्ञानिक वजहें

KNEWS DESK- नए साल का पहला प्रमुख पर्व मकर संक्रांति हर साल 14 जनवरी को मनाया जाता है। हालांकि कुछ लोगों में यह कंफ्यूजन रहता है कि यह त्योहार 14 जनवरी को है या 15 जनवरी को। परंपरा और ज्योतिषानुसार, हर साल 14 जनवरी को ही मकर संक्रांति मनाई जाती है।

यह दिन हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है और इसे खिचड़ी, दान और पतंग उड़ाने के पर्व के रूप में मनाया जाता है। खासकर पतंग उड़ाने की परंपरा इस दिन का सबसे रोचक पहलू है।

पतंग उड़ाने की परंपरा का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व

  • इतिहासकारों के अनुसार, मुगल काल में पतंग उड़ाना शाही शौक था।
  • समय के साथ यह शौक भारतीय संस्कृति का हिस्सा बन गया।
  • पतंग उड़ाना मौसम के बदलाव और बसंत के आगमन की खुशी का प्रतीक माना जाता है।
  • आज यह परंपरा इतनी लोकप्रिय है कि कई राज्यों में पतंगबाजी प्रतियोगिताएं आयोजित होती हैं, जिनमें हजारों लोग भाग लेते हैं।

विज्ञान की नजर में पतंग उड़ाना क्यों फायदेमंद है

  • मकर संक्रांति के समय ठंड कम होने लगती है, यानी मौसम में बदलाव शुरू होता है।
  • धूप में बाहर रहना शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होता है।
  • विटामिन D मिलता है, जो हड्डियों को मजबूत करता है।
  • इम्यूनिटी बढ़ती है और दांतों की कई समस्याओं से बचाव होता है।
  • पतंग उड़ाने और धूप में सक्रिय रहने से दिमाग तेज रहता है और शरीर हमेशा एक्टिव रहता है।

मकर संक्रांति सिर्फ खिचड़ी और दान का पर्व नहीं, बल्कि पतंग उड़ाने की परंपरा के माध्यम से स्वास्थ्य और उत्साह का भी संदेश देती है। यह पर्व परंपरा, इतिहास और विज्ञान का अनोखा संगम है, जो हर साल लोगों के जीवन में खुशियों और ऊर्जा का संचार करता है।

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