KNEWS DESK- उत्तर भारत में खुशियों और नई फसल के स्वागत का प्रतीक लोहड़ी का पर्व आज पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। खासकर पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में इस त्योहार की रौनक देखते ही बनती है। ढोल की थाप पर गिद्दा-भांगड़ा, आग के चारों ओर नाचते-गाते लोग और पारंपरिक लोकगीत—लोहड़ी भाईचारे, उल्लास और समृद्धि का संदेश देती है।

अगर आप भी आज शाम लोहड़ी पूजन की तैयारी कर रहे हैं, तो यहां जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इस पर्व का धार्मिक-सांस्कृतिक महत्व।
लोहड़ी 2026: पूजा का शुभ मुहूर्त
- लोहड़ी तिथि: 13 जनवरी 2026 (मंगलवार)
- संक्रांति क्षण: शाम 04:05 बजे
- लोहड़ी दहन (पूजा) समय: शाम 05:45 बजे से रात 08:30 बजे तक
शास्त्रों के अनुसार, गोधूलि बेला—जब सूर्य अस्त होने को होता है—लोहड़ी जलाने के लिए सबसे उत्तम मानी जाती है।
लोहड़ी पूजा कैसे करें?
- घर के खुले आंगन या चौक में लकड़ियां और उपले (कंडे) एकत्र कर अग्नि प्रज्वलित करें।
- परिवार के सभी सदस्य अग्नि के चारों ओर एकत्र होकर 7 या 11 बार परिक्रमा करें।
- परिक्रमा के दौरान अग्नि में तिल, गुड़, रेवड़ी, मूंगफली और मक्का अर्पित करें।
- सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और दरिद्रता नाश की कामना करें।
- पूजा के बाद तिल, गुड़, गजक और मूंगफली को प्रसाद के रूप में बांटें।
क्यों मनाई जाती है लोहड़ी?
लोहड़ी मुख्य रूप से रबी फसल के पकने की खुशी में मनाई जाती है। किसान इस दिन सूर्य देव और अग्नि देव का आभार व्यक्त करते हैं, जिनकी कृपा से फसल लहलहाती है।
इसके साथ ही लोहड़ी का गहरा संबंध दुल्ला भट्टी की लोककथा से भी है। मुगल काल में उन्होंने गरीब लड़कियों की रक्षा कर उनकी शादियां कराईं। इसी कारण लोहड़ी के लोकगीतों में उनका नाम सम्मान के साथ लिया जाता है।
नई दुल्हन और बच्चों के लिए खास लोहड़ी
जिन घरों में नई शादी हुई हो या जहां नवजात शिशु का पहला साल हो, वहां लोहड़ी का महत्व और भी बढ़ जाता है। इसे पहली लोहड़ी के रूप में धूमधाम से मनाया जाता है, रिश्तेदारों को बुलाया जाता है और विशेष दावत का आयोजन किया जाता है।
ढोल-नगाड़ों, लोकगीतों और आस्था के संग लोहड़ी न सिर्फ एक त्योहार है, बल्कि कृतज्ञता, सामूहिकता और नई शुरुआत का उत्सव भी है। सभी को लोहड़ी की हार्दिक शुभकामनाएं!