डिजिटल डेस्क- बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा लगातार बढ़ती जा रही है। सुनामगंज जिले के दिराई उपज़िला के भंगदोहोर गांव में 8 जनवरी को जॉय महापात्रो नामक एक युवा हिंदू की बेरहमी से हत्या कर दी गई। परिवार के अनुसार, जॉय को पहले पीटा गया और बाद में स्थानीय व्यक्ति अमीरुल इस्लाम द्वारा जहर खिलाया गया। गंभीर रूप से घायल जॉय को सिलहट के एमएजी उस्मानी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया, जहां उसकी मौत हो गई। इस घटना ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। बीते 18 दिनों में बांग्लादेश में सात हिंदू पुरुषों की हत्या हो चुकी है। यह सिलसिला स्पष्ट करता है कि सरकार की पकड़ कमजोर होने पर अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ हिंसा में तेजी आती है।
विदेश मंत्रालय प्रवक्ता ने व्यक्त की गहरी चिंता
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा, “हम बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों और उनके घरों व व्यवसायों पर चरमपंथियों द्वारा बार-बार किए जा रहे हमलों की गंभीरता को देखते हैं। इस तरह की सांप्रदायिक घटनाओं से तुरंत और सख्ती से निपटना बेहद जरूरी है। हमने देखा है कि इन हिंसाओं को कभी-कभी व्यक्तिगत दुश्मनी, राजनीतिक मतभेद या बाहरी कारणों से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन ऐसी अनदेखी से अपराधियों का हौसला बढ़ता है और अल्पसंख्यकों में भय एवं असुरक्षा की भावना और गहरी हो जाती है।”
जनवरी में अब तक हो चुकी हैं 4 हत्याएं
बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद (बीएचबीसीयूसी) ने पिछले महीने सांप्रदायिक हिंसा की 51 घटनाओं का रिकॉर्ड प्रस्तुत किया। इनमें 10 हत्याएं, 10 चोरी और डकैती के मामले, तथा घरों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और मंदिरों पर कब्जा करने, लूटपाट और आगजनी से जुड़ी 23 घटनाएं शामिल थीं। जनवरी में अब तक चार और हिंदुओं की हत्या की जा चुकी है, जिससे दिसंबर से लेकर अब तक मरने वालों की कुल संख्या 14 तक पहुंच गई है।