चुनावी समय रहा खिसक, मुद्दे गए भटक !

उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट – उत्तराखंड में अगले साल 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं. चुनाव से पहले सभी राजनीतिक दल अपना कुनबा बढ़ाने में लगे हुए हैं. बुधवार को जहां बीजेपी ने बड़ी संख्या में लोगों को अपनी पार्टी में शामिल करवाया, तो वहीं गुरुवार को कांग्रेस ने 20 से अधिक सरकारी सेवाओं से सेवानिवृत हुए पूर्व अधिकारियों को पार्टी की सदस्यता दिलाई. इस कार्यक्रम में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल और पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत भी मौजूद रहे. वहीं सत्ता दल में आज कल पूर्व पार्टी विधायक सुरेश राठौर और उनकी कथित पत्नी उर्मिला सनावर के अंकिता भंडारी हत्याकांड पर वायरल ऑडियो-वीडियो से आए बवंडर से बीजेपी अपनी कश्ती संभालने में लगी है. एक ओर इस मामले पर कांग्रेस प्रदेश भर में सड़कों पर है और उनके सभी बड़े नेता कहीं न कहीं धरना-प्रदर्शन और कैंडल मार्च निकाल रहे हैं, वहीं बीजेपी डैमेज कंट्रोल में लगी है. इसी के तहत बुधवार को बड़ी संख्या में लोगों को बीजेपी ने पार्टी की सदस्यता दिलाई है. साथ ही प्रदेश भर में आगामी चुनाव को देखते हुए भाजपा का जन जन की सरकार जन जन के द्वार कार्यक्रम से जनता के बीच अपनी भूमिका तैयार कर रही है. वहीं मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने भी जनता के बीच जाने का कार्यक्रम तय कर लिया है. ऐसे में बीजेपी डैमेज कंट्रोल में लगी है और विपक्षी दल भी सदस्यों को जोड़ने साथ ही अब तक के कामों में फेल रही भाजपा सरकार पर हल्ला बोलते हुए आम जनता की समस्याओं को जागरूकता अभियान का सहारा लेकर 2027 की जमीन तलशने जा रही है.   

कई दिनों से मुश्किलों में चल रही भाजपा उर्मिला सनावर के पुलिस के सामने पेश होने के बाद थोड़ी राहत में नजर आई. बुधवार को पार्टी कार्यालय पर भाजपा ने बड़ी संख्या में लोगों को पार्टी की सदस्यता दिलाई. उसके बाद अब भाजपा अब तक हुए नुकसान की भरपाई में लग गई है. वहीं मुख्य विपक्षी दल भला कहा पीछे रह सकता है. कांग्रेस ने भी अगले दिन गुरुवार को अपने सदस्यता कार्यक्रम को आयोजित कर 20 से अधिक सरकारी सेवाओं से सेवानिवृत हुए पूर्व अधिकारियों को पार्टी की सदस्यता दिलाई. साथ ही बड़ा जागरूक अभियान सरकार नाकामियों को गिनने के लिए हर जिले में करने जा रही है. वहीं भाजपा का जन जन की सरकार जन जन के द्वार कार्यक्रम से जनता के बीच अपनी भूमिका तैयार करने का प्लान पहले से ही जरूरी है। 

नया साल आते आते प्रदेश में भर्ती परीक्षा घोटाले और अंकिता हत्याकांड प्रमुख रहे जिसके चलते भाजपा को कई नुकसान हुए है. साथ ही कई अहम कार्यक्रम प्रभावित हुए, आप भी एक नजर में जानिए इन विशेष कार्यक्रमों की रूपरेखा –

अटल जन्म शताब्दी वर्ष के कार्यक्रम और विचार गोष्ठियों प्रभाव नहीं छोड़ सकी. प्री-एसआईआर, बीएलए 2 जैसे संगठनात्मक कार्यक्रम प्रभावित रहे. ‘जन-जन की सरकार, जनता के द्वार’ कार्यक्रमों में जनता का विरोध देखने को मिल रहा है. ‘विकसित भारत जी राम जी’ योजना पर प्रेस करने आए मुख्यमंत्री को योजना की बजाय अंकिता मामले में ज्यादा बोलना पड़ा. ‘विकसित भारत जी राम जी’ जनजागरण अभियान अब तक शुरू नहीं हो पाया. खेल महाकुंभ का नाम बदलकर मुख्यमंत्री चैंपियन ट्रॉफी कर दिया गया. इसे भी बीजेपी भुनाने में ना कामयाब रही.

प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव की हवा साल के शुरुआती महीने से ही शुरू हो चुकी है. ऐसे में सत्ताधारी दलों के साथ अन्य विपक्षी दलों ने अपनी बिषक बिछाना शुरू कर दिया है. साथ ही आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला भी अपने चरम पर है. विपक्षी अपने दल को मजबूत करने के साथ सत्ता दल को चुनावी मैदान में चित करने की कायवाद में जुट चुके है. और सत्ता दल भाजपा विपक्ष की रणनीति को भांपते हुए अपने कदमों को हुक हुक कर चल रही है.

कुल मिला कर चुनावी दंगल शुरू हो चुका है, हर राजनैतिक दल अपनी तैयारियों में जुटा है. और इस बार भाजपा की रही दो बार सरकार को बाहर करने की कवायद भी जारी है. मुद्दे भले कोई भी हो आखिर जनता सब जानती है. इस बार 2027 के चुनाव भाजपा के लिए भी आसान बात नहीं होगी अगर इस तहर से आने वाले चुनावी समय पर ये आंदोलन और विभिन्न योजनाओं को भाजपा सरकार जनता के बीच पहुंचने में असमर्थ रही तो जानकारों के मुताबिक राजनीति के इस दंगल में बड़ा फेर बदल देखने को भी मिल सकता है. ऐसे में विपक्ष इस दंगल को मंगल में बदलने पर कितना खरा उतरता है.बरहाल ये देखने वाली बात होगी।

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