इटावा में शिवपाल यादव का भाजपा पर तीखा हमला, बोले—देश को कर्ज में डुबो दिया, किसानों की कर रहे अनदेखी

डिजिटल डेस्क- इटावा जिले के जसवंतनगर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम अधियापुरा में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव ने भाजपा सरकार पर जोरदार हमला बोला। वे गांव में कार्यकर्ताओं के साथ कंबल वितरण कार्यक्रम में पहुंचे थे, जहां उन्होंने केंद्र और प्रदेश सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश लगातार पीछे की ओर जा रहा है और भाजपा केवल झूठ और दिखावे की राजनीति कर रही है। शिवपाल यादव ने कहा कि भाजपा 1947 की बातें करती है, लेकिन यह नहीं बताती कि उनके शासनकाल में देश की आर्थिक हालत कितनी खराब हो गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भाजपा सत्ता में आई थी, तब देश पर कुल कर्ज 34 प्रतिशत था, लेकिन आज यह बढ़कर 93 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इतना ही नहीं, पहले केवल 34 प्रतिशत का ब्याज देना पड़ता था, जबकि अब 93 प्रतिशत ब्याज चुकाया जा रहा है। उन्होंने सवाल किया कि इतनी भारी कर्जदार स्थिति में देश कैसे विकसित हो सकता है।

वर्तमान सरकार में तहसीलदार और लेखपाल खुलेआम मांग रहे रूपए- शिवपाल सिंह यादव

ग्राम सभा की जमीन पर बने मकानों को लेकर शिवपाल यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार में उन्होंने इसके लिए कानून बनाया था। उनका कहना था कि जिन ग्रामीणों के मकान ग्राम सभा की जमीन पर बने हैं और जिनका वर्षों से कब्जा है, उनकी लिखापढ़ी कराकर जमीन उनके नाम की जानी चाहिए। लेकिन वर्तमान सरकार में ‘घरौनी’ के नाम पर तहसीलदार और लेखपाल खुलेआम एक लाख से लेकर पांच लाख रुपये तक की मांग कर रहे हैं। उन्होंने इसे सीधी लूट करार दिया। बिजली व्यवस्था को लेकर भी शिवपाल यादव ने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि आज हालत यह है कि दिन में भी बिजली नहीं मिल रही है। कड़ाके की ठंड और घने कोहरे में किसान बेहद परेशान हैं।

बिजली मंत्री पर साधा निशाना

उन्होंने सवाल उठाया कि जब बिजली नहीं होगी तो किसान खेतों में पानी कैसे लगाएगा, खासकर आलू जैसी फसलों में सिंचाई कैसे होगी। उन्होंने बिजली मंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि उनसे पूछा जाना चाहिए कि किसान बिना बिजली के खेती कैसे करेगा। शिवपाल यादव ने बताया कि उन्होंने पहले ही मांग की थी कि किसानों को कम से कम 10 घंटे रात में और 10 घंटे दिन में बिजली दी जाए, ताकि वे अपनी फसलों की सिंचाई कर सकें। लेकिन सरकार ने इस मांग को गंभीरता से नहीं लिया।

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