डिजिटल डेस्क- महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच कथित गठबंधन की खबरों ने सियासी हलचल तेज कर दी है। इन अटकलों पर अब कांग्रेस ने साफ शब्दों में खंडन करते हुए कहा है कि भाजपा और कांग्रेस के बीच किसी तरह का गठबंधन नहीं हुआ है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि स्थानीय स्तर पर कुछ दलों और निर्दलीयों ने मिलकर एक अलग मंच बनाया है, जिसे गलत तरीके से भाजपा-कांग्रेस गठबंधन बताया जा रहा है। दरअसल, हाल ही में यह खबरें सामने आई थीं कि महाराष्ट्र के अंबरनाथ नगर परिषद चुनाव में भाजपा और कांग्रेस ने साथ मिलकर चुनाव लड़ने का फैसला किया है। यह भी दावा किया गया कि इस कथित गठबंधन के जरिए उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना को साइडलाइन किया गया है। इन खबरों के सामने आते ही शिवसेना की ओर से तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली और पार्टी ने इसे विश्वासघात करार दिया।
कांग्रेस नेता सचिव सावंत ने स्पष्ट की वस्तु स्थिति
कांग्रेस नेता सचिव सावंत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि भाजपा और कांग्रेस ने कोई गठबंधन नहीं किया है। उन्होंने लिखा कि अंबरनाथ में पार्टी संबद्धता और चुनाव चिह्नों को दरकिनार करते हुए अलग-अलग दलों के कार्यकर्ताओं ने मिलकर “अंबरनाथ डेवलपमेंट फ्रंट” बनाया है। सावंत के अनुसार, यह मंच स्थानीय स्तर पर शिंदे सेना पर लगाए जा रहे भ्रष्टाचार के आरोपों के विरोध में बना है, जिसमें निर्दलीय उम्मीदवार भी शामिल हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भाजपा और कांग्रेस के साथ आने की खबरें पूरी तरह गलत हैं और इस तरह की अफवाहों से बचा जाना चाहिए।
शिवसेना की नाराजगी, भाजपा पर लगाए आरोप
इधर, इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, इस पूरे घटनाक्रम से शिवसेना खासा नाराज नजर आ रही है। शिंदे गुट के विधायक बालाजी किनिकर ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि जो पार्टी “कांग्रेस मुक्त भारत” की बात करती है, वही अब कांग्रेस के साथ मिलकर सत्ता की राजनीति कर रही है। उन्होंने इसे शिवसेना की पीठ में छुरा घोंपने जैसा बताया। वहीं, भाजपा नेता गुलाबराव करनजुले पाटिल ने शिवसेना पर पलटवार करते हुए कहा कि शिवसेना के साथ गठबंधन अपने आप में अपवित्र होता। उन्होंने आरोप लगाया कि शिवसेना पिछले 25 वर्षों से भ्रष्टाचार में लिप्त रही है। पाटिल का दावा है कि भाजपा ने अंबरनाथ में शिवसेना के साथ गठबंधन के कई प्रयास किए थे, लेकिन शिवसेना नेतृत्व की ओर से कभी सकारात्मक जवाब नहीं मिला।