बिहार चुनाव हार के बाद कांग्रेस ने तेजस्वी पर फोड़ा ठीकरा, सीट बंटवारे से लेकर प्रचार तक उठे बड़े सवाल

KNEWS DESK – बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद महागठबंधन के भीतर नाराज़गी अब खुलकर सामने आने लगी है। कांग्रेस आलाकमान ने इस हार की समीक्षा शुरू कर दी है और पार्टी के अंदर गहराई से यह मान्यता बन रही है कि पराजय के मुख्य जिम्मेदार आरजेडी नेता तेजस्वी यादव हैं। कांग्रेस के सूत्र बताते हैं कि राजद ने सीट बंटवारे में खुलकर मनमानी की, जिसका खामियाज़ा पूरे गठबंधन को उठाना पड़ा।

सीट बंटवारे पर कांग्रेस का आरोप

कांग्रेस को कुल 61 सीटें दी गईं, जिनमें से 9 पर फ्रेंडली फाइट हुई। 23 सीटें ऐसी थीं जहां पिछले कई चुनावों से न कांग्रेस जीती थी और न राजद। 15 सीटें वे थीं जहां पिछले लंबे समय में कांग्रेस और राजद केवल एक बार जीत सके थे। कांग्रेस के सूत्रों के मुताबिक महागठबंधन में उन्हें सिर्फ 14 “जिताऊ सीटें” मिलीं| इनमें से भी कांग्रेस केवल 6 सीटें जीत पाई| बाकी सीटें “जान बूझकर मुश्किल ज़ोन” में दी गईं| कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि यह सब कुछ तेजस्वी यादव के दबाव में हुआ, जिसने गठबंधन की रणनीति को कमजोर बना दिया।

तेजस्वी को सीएम फेस बनाए जाने से पैदा हुई दरार

सूत्रों के अनुसार, महागठबंधन के भीतर सीएम फेस को लेकर भारी खींचतान रही। राजद ने शुरू से ही तेजस्वी को सीएम उम्मीदवार घोषित करने पर जोर दिया, जबकि LJP(R) और वीआईपी जैसे दल इस पर असहमत थे।

तेजस्वी को सीएम फेस घोषित किए जाने के बाद मुस्लिम वोटों में असंतोष बढ़ा, ओवैसी और जेडीयू को इसका लाभ मिला| दलित और सवर्ण वोटर्स में भी नकारात्मक असर दिखा| वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी को डिप्टी सीएम बनाए जाने की घोषणा उलटी पड़ी| कांग्रेस का मानना है कि इन फैसलों ने गठबंधन का सामाजिक समीकरण बिगाड़ दिया।

नीतीश के मुकाबले फीके पड़े तेजस्वी

कांग्रेस की समीक्षा रिपोर्ट के मुताबिक तेजस्वी पिछले 5 साल जनता से सीधे जुड़े अभियान से दूर रहे| रोजगार और पलायन जैसे मुद्दों को समय रहते नहीं उठाया| आख़िरी दस दिनों में 25–25 रैलियां करने का कोई असर नहीं हुआ| वे घोषणा-पत्र के मुख्य बिंदुओं को जनता तक प्रभावी तरीके से नहीं पहुंचा सके| कांग्रेस को लगता है कि नीतीश कुमार के अनुभव और छवि के सामने तेजस्वी रणनीतिक रूप से कमजोर दिखाई दिए।

कांग्रेस नेताओं का दावा है कि एनडीए ने दूसरे राज्यों से काम करने वाले बिहारियों को टिकट देकर वापस भेजा| बड़ी संख्या में यह वोट NDA को मिले| चुनाव के समय जीविका दीदियों के खातों में 10 हजार रुपए जाने से मतदाताओं पर प्रभाव पड़ा| चुनाव आयोग ने भी इस पर कोई कार्रवाई नहीं की| कांग्रेस का आरोप है कि विपक्ष इस मुद्दे को जनता से जोड़ नहीं पाया।

वोट चोरी का मुद्दा कमजोर साबित हुआ

कांग्रेस की शिकायत है कि पार्टी ने वोट चोरी और SIR गड़बड़ी का मुद्दा जोरदार उठाया, लेकिन तेजस्वी और राजद ने इसे ममता बनर्जी की तरह मजबूत नैरेटिव नहीं बनाया| कांग्रेस नेताओं के अनुसार, विपक्ष अगर ईवीएम–SIR और वोट ट्रांसफर जैसे मुद्दों पर एकजुट नहीं होता, तो BJP बार-बार चुनावी बढ़त हासिल करती रहेगी।

कांग्रेस ने यह भी तय किया है कि वोट चोरी और SIR गड़बड़ी पर विस्तृत डेटा तैयार किया जाएगा| दिसंबर की शुरुआत में दिल्ली के रामलीला मैदान में एक विशाल रैली की जाएगी| इस रैली में INDIA गठबंधन के सभी दलों को बुलाया जाएगा| राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने इस मुद्दे पर लालू यादव और तेजस्वी से बात की है, और विपक्ष को एकजुट करने की कोशिश जारी है।