दावोस में ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का औपचारिक ऐलान, ट्रंप के कान में शहबाज शरीफ की फुसफुसाहट ने खींचा दुनिया का ध्यान

डिजिटल डेस्क- दुनिया भर में लंबे समय से चर्चा में रहे ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का अब औपचारिक ऐलान हो गया है। स्विट्जरलैंड के दावोस में विश्व आर्थिक मंच (WEF) के वार्षिक सम्मेलन के इतर आयोजित विशेष कार्यक्रम में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अगुआई में इस नए वैश्विक मंच की घोषणा की गई। लॉन्चिंग सेरेमनी के दौरान एक तस्वीर ने सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरीं—जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, ट्रंप से हाथ मिलाने के बाद उनके कान में कुछ फुसफुसाते नजर आए। इस क्षण को ट्रंप ने भी ध्यान से सुना और जवाब में शहबाज के कंधे पर थपथपी की, हालांकि दोनों के बीच हुई बातचीत सार्वजनिक नहीं हो सकी।

करीब 20 देशों की मौजूदगी, 59 के दावे

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि 59 देशों ने बोर्ड ऑफ पीस के चार्टर पर हस्ताक्षर किए हैं। हालांकि, गुरुवार को पहले समूह के औपचारिक अनावरण के दौरान मंच पर करीब 20 देशों के प्रतिनिधि ही नजर आए। इनमें से अधिकतर मिडिल ईस्ट के देश थे। पश्चिमी देशों की भागीदारी को लेकर अब भी असमंजस बना हुआ है और ट्रंप प्रशासन को उनका समर्थन जुटाने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। बताया गया है कि इस बोर्ड का स्थायी सदस्य बनने के लिए देशों को एक अरब डॉलर का योगदान देना होगा। इसी शर्त के चलते कई बड़े और प्रभावशाली देशों ने अभी खुलकर उत्साह नहीं दिखाया है। उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए ट्रंप ने अजरबैजान, हंगरी, पराग्वे समेत कई देशों के नेताओं और राजनयिकों से कहा, “आप दुनिया के सबसे शक्तिशाली लोग हैं। आप में से हर कोई मेरा दोस्त है।” इसके बाद उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में चुटकी लेते हुए कहा कि इनमें से अधिकतर नेता बेहद चर्चित हैं, कुछ लोकप्रिय भी हैं, और राजनीति में ऐसा चलता रहता है। ट्रंप के इस बयान पर समारोह में मौजूद प्रतिनिधियों के बीच हल्की मुस्कान भी देखने को मिली।

पाकिस्तान को मिली ‘पीछे की सीट’

गौर करने वाली बात यह रही कि बोर्ड ऑफ पीस की लॉन्चिंग सेरेमनी में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को फ्रंट रो में जगह नहीं मिली। उन्हें पीछे की सीट पर बैठाया गया था। गाजा में शांति के नाम पर गठित इस बोर्ड में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर कई सदस्य देशों ने पहले ही आशंका जताई है। हाल ही में इजरायल के भारतीय दूत रूवेन अजार ने एक टीवी इंटरव्यू में साफ कहा था कि गाजा में पाकिस्तानी सेना की किसी भी भूमिका को लेकर इजरायल सहज नहीं है। उन्होंने हमास और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठनों के पाकिस्तान से कथित संबंधों पर चिंता जताई थी। इसी वजह से बोर्ड ऑफ पीस में पाकिस्तान की भागीदारी को लेकर भी कई देशों के मन में सवाल बने हुए हैं।

गाजा से वैश्विक शांति तक

शुरुआत में इस संगठन का उद्देश्य गाजा के पुनर्निर्माण और वहां शांति स्थापना बताया गया था, लेकिन अब इसे एक वैश्विक शांति निकाय के रूप में पेश किया जा रहा है। भारत को भी इस बोर्ड का सदस्य बनने का प्रस्ताव दिया गया है, हालांकि इस पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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