Knews Desk- दिल्ली-NCR में H1N1 और मौसमी इन्फ्लूएंजा के बढ़ते मामलों ने चिंता बढ़ा दी है। संक्रमण के बढ़ते असर के बीच दिल्ली सरकार ने लोगों से सावधानी बरतने, साफ-सफाई का ध्यान रखने, भीड़भाड़ वाली जगहों से दूरी बनाने और लक्षण नजर आने पर समय पर डॉक्टर से सलाह लेने की अपील की है।
इस बीच लोकलसर्कल्स की ओर से 23 अगस्त को जारी सर्वे में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। दिल्ली-NCR के करीब 54 फीसदी घरों में कम से कम एक सदस्य में फ्लू या वायरल बुखार जैसे लक्षण पाए गए हैं। सर्वे में दिल्ली के अलावा गुरुग्राम, नोएडा, फरीदाबाद और गाजियाबाद के 32,643 लोगों से प्रतिक्रिया ली गई।
सर्वे के मुताबिक, 23 फीसदी घरों में चार या उससे ज्यादा लोगों में फ्लू जैसे लक्षण दिखाई दिए। वहीं, 16 फीसदी घरों में दो से तीन सदस्य इन लक्षणों से प्रभावित मिले, जबकि 15 फीसदी घरों में कम से कम एक व्यक्ति में ऐसे लक्षण पाए गए। कुल 39 फीसदी घरों में एक ही समय पर दो या उससे अधिक लोगों में लक्षण दिखे, जिससे घर के भीतर संक्रमण फैलने की आशंका का पता चलता है।
दिल्ली में H1N1 के मामले तेजी से बढ़े
दिल्ली में 20 अगस्त को इन्फ्लूएंजा के 159 नए मामले सामने आए। इनमें 114 केस H1N1 से जुड़े थे। इस साल राजधानी में अब तक इन्फ्लूएंजा-A के 2,392 मामले दर्ज हो चुके हैं। इनमें 1,777 H1N1, 37 H1, 138 H3 और 440 अन्य इन्फ्लूएंजा के मामले शामिल हैं।
पिछले साल इसी अवधि में H1N1 के 229 मामले दर्ज किए गए थे। इस लिहाज से इस साल मामलों में करीब आठ गुना बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, आधिकारिक आंकड़ों में मुख्य रूप से अस्पतालों और लैब में जांच कराने वाले मरीज शामिल हैं। ऐसे लोग जो हल्के लक्षणों के बाद बिना टेस्ट कराए घर पर ठीक हो गए, संभव है कि वे इन आंकड़ों में शामिल न हों।
ICMR ने नए स्ट्रेन की खबर से किया इनकार
H1N1 के बढ़ते मामलों के बीच ICMR ने स्पष्ट किया है कि भारत में वायरस का कोई नया स्ट्रेन सामने नहीं आया है। ICMR के अनुसार, देश में फैल रहा H1N1 वायरस A/Missouri/11/2025 (H1N1) pdm09 जैसे स्ट्रेन से मिलता-जुलता है, जो 2025 से ही मौजूद है।
इन्फ्लूएंजा के सामान्य लक्षणों में बुखार, खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, शरीर में दर्द, ठंड लगना और थकान शामिल हैं। ICMR के मुताबिक, मौसमी इन्फ्लूएंजा ज्यादातर मामलों में गंभीर बीमारी नहीं बनता और आराम व उचित देखभाल से मरीज ठीक हो जाते हैं।
हालांकि, छोटे बच्चों, बुजुर्गों और पहले से किसी बीमारी से पीड़ित लोगों में संक्रमण के गंभीर रूप लेने का खतरा ज्यादा रहता है। ऐसे लोगों में लक्षण दिखाई देने पर लापरवाही न बरतते हुए चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।