डिजिटल डेस्क- असम में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रिपुन बोरा ने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता समेत सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस कदम ने राज्य की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है, खासकर ऐसे समय में जब चुनावी सरगर्मी तेज होने वाली है। रिपुन बोरा असम कांग्रेस के प्रमुख चेहरों में रहे हैं। वह 2016 में प्रदेश अध्यक्ष बने और करीब पांच वर्षों तक संगठन की कमान संभाली। 2021 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद उन्होंने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। वह राज्यसभा सांसद भी रह चुके हैं और 2001 में पहली बार विधायक चुने गए थे। तरुण गोगोई सरकार के दो कार्यकालों में वे मंत्री भी रहे।
2022 में कांग्रेस को छोड़कर टीएमसी का थामा था दामन
राजनीतिक सफर में उतार-चढ़ाव भी देखने को मिले। 2022 में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर टीएमसी का दामन थामा था, लेकिन 2024 में फिर से कांग्रेस में वापसी कर ली। हालांकि वापसी के बाद वह ज्यादा सक्रिय नजर नहीं आए। ऐसे में उनका इस्तीफा कांग्रेस के लिए अहम माना जा रहा है और इससे पार्टी को चुनावी नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। इधर, राज्य की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो गया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई के बीच तीखी बयानबाजी जारी है।
बिना सबूत के कर रहे हैं हमला- गौरव गोगोई
पहले सीएम पर जमीन को लेकर आरोप लगे, तो जवाब में सरमा ने गोगोई और उनके परिवार पर गंभीर आरोप लगाए। गोगोई ने पलटवार करते हुए कहा कि सीएम बिना सबूत के व्यक्तिगत हमले कर रहे हैं। कांग्रेस नेताओं ने भी सीएम पर निशाना साधते हुए कहा है कि यदि आरोपों में दम है तो कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की गई। इस पूरे घटनाक्रम ने असम की सियासत को और गरमा दिया है। चर्चा यह भी है कि रिपुन बोरा भविष्य में किसी अन्य दल, संभवतः भाजपा, का रुख कर सकते हैं। हालांकि इस पर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।