मुरादाबाद के दिल में क्या है ?

पीतल नगरी मुरादाबाद की मुरादाबाद ग्रामीण विधानसभा सीट की मुरादाबाद ग्रामीण विधानसभा सीट 1957 में अस्तित्व में आई। तब से आज तक इस सीट पर निर्दलीय से लेकर राजनीति के बड़े-बड़े धुरंधर चुनाव लड़ चुके हैं और जीतकर उत्तर प्रदेश विधानसभा में पहुंचे हैं। यह सीट मुरादाबाद लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है और अनारक्षित है। मुरादाबाद ग्रामीण विधानसभा सीट मुस्लिम बाहुल्य मानी जाती है। यहां 55 प्रतिशत मुस्लिम और 45 प्रतिशत हिन्दू मतदाता हैं। मुस्लिम मतदाताओं में अंसारी मतदाताओं की तादात ज्यादा है, वहीं हिन्दू मतदाताओं में वैश्य और ठाकुर मतदाता प्रभावी भूमिका में हैं। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार मुरादाबाद ग्रामीण विधान सभा सीट पर कुल 345451 मतदाता हैं। इनमें 188650 पुरुष जबकि 156788 महिला मतदाता हैं।

मुरादाबाद ग्रामीण विधानसभा में मतदाता

  • ग्रामीण विधानसभा में कुल मतदाता 3 लाख 45 हजार 451
  • पुरुष मतदाता 1 लाख 88 हजार 650
  • महिला मतदाता 1 लाख 56 हजार 788
  • विधानसभा सीट में मुस्लिमों की बाहूल्यता
  • विधानसभा सीट में 55 फीसदी मुस्लिम मतदाता
  • विधानसभा सीट में 45 फीसदी हिन्दू मतदाता
  • मुस्लिम मतदाताओं में अंसारी मतदाताओं की तादात ज्यादा
  • हिन्दू मतदाताओं में वैश्य और ठाकुर मतदाता प्रभावी

वर्तमान में मुरादाबाद ग्रामीण विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी का कब्जा है। साल 2017 के विधानसभा चुनाव में सपा प्रत्याशी हाजी इकराम कुरैशी ने बीजेपी उम्मीदवार हरिओम शर्मा को 28 हजार से ज्यादा मतों से शिकस्त दी।

2017- कौन जीता कौन हारा

  • सपा के हाजी इकराम कुरैशी ने दर्ज की जीत
  • हाजी इकराम कुरैशी को मिले 97 हजार 916 वोट
  • बीजेपी के हरिओम शर्मा को हराया
  • हरिओम शर्मा को 28 हजार से ज्यादा वोटों से दी मात
  • हरिओम शर्मा को मिले 69 हजार 135 वोट
  • रालोद के मो. कामरानुल हक तीसरे नंबर पर रहे
  • कामरानुल हक को मिले 23 हजार 404 वोट
  • चौथे पायदान पर रहा बीएसपी का प्रत्याशी
  • पन्नालाल उर्फ बबलू सैनी को लिले मात्र 20 हजार 054 वोट

हाजी इकराम कुरैशी

हाजी इकराम कुरैशी सपा के मुरादाबाद जिलाध्यक्ष रह चुके हैं। वह 2017 में पहली बार विधायक बने, साल 2017 के चुनाव में मुलायम सिंह यादव ने उम्मीदवारों की जो लिस्ट फाइनल की थी उसमें हाजी इकराम कुरैशी का नाम नहीं था। अखिलेश यादव के हस्तक्षेप के बाद उन्हें मुरादाबाद ग्रामीण सीट से सपा प्रत्याशी बनाया गया और उन्होंने जीत दर्ज की, साल 2017 के विधानसभा चुनाव के ठीक पहले मुलायम के पारिवारिक विवाद में हाजी इकराम अखिलेश के पक्ष में मजबूती से खड़े रहे, जिसका फल उन्हें असेंबली चुनाव के टिकट के रूप में मिला। सपा विधायक का आरोप है कि विपक्षी पार्टी का होने के नाते उन्हें मौजूदा सरकार से पर्याप्त सहयोग नहीं मिलता, इसलिए वह अपने निर्वाचन क्षेत्र में मनमुताबिक विकास के काम नहीं करवा पाते हैं। उनका कहना है कि जब प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार आएगी तो विधानसभा के साथ-साथ पूरे प्रदेश के विकास कार्य जल्दी हो पाएंगे।

Knews ने जनता के बीच जाकर उनका मूड जानना चाहा

वहीं जब Knews ने जनता के बीच जाकर उनका मूड जानना चाहा तो जनता ने भी कैमरे पर अपने मन की बात रखी । मुरादाबाद ग्रामीण विधानसभा की सीमा उत्तरांचल से मिली हुई है। उसके बावजूद इस क्षेत्र में पर्यटकों को रोकने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। राष्ट्रीय राजमार्ग और क्षेत्रीय सड़के सभी का बुरा हाल है। बारिश के दिनों में तो सड़कों का बहुत बुरा हाल हो जाता है। भोजपुर से सीधे किसी भी जगह जाने के लिए रोडवेज बसों का संचालन नहीं होता है। सवारियों को उत्तरांचल से आने वाली बसों या फिर प्राइवेट बसों पर ही निर्भर रहना पड़ता है। इलाज के लिए भी या तो मुरादाबाद या फिर काशीपुर जाना पड़ता है। कोई बड़ा उद्योग नहीं होने की वजह से ज्यादातर लोगो को मुरादाबाद या फिर उत्तरांचल में काशीपुर मजदूरी या प्राइवेट नौकरी करने के लिए जाना पड़ता है।

पीतल नगरी मुरादाबाद 

पूरी दुनिया में मुरादाबाद को पीतल नगरी के नाम से जाना जाता है क्योंकि यहां का पीतल सोने से ज्यादा चमकदार होता है और यहां के कारीगरों की कारीगरी भी पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। मुरादाबाद ग्रामीण विधानसभा सीट पर पिछले दो बार के विधानसभा चुनाव 2012 और 2017 से सपा का कब्जा है। तो अब देखना दिलचस्प होगा कि विधानसभा चुनाव 2022 में पिछली बार की तरह इस बार भी मुरादाबाद ग्रामीण विधानसभा सीट सपा के पाले में गिरती है। या फिर दूसरे दल इस बार बाजी मारने में और सपा का किला भेदने में सफल होंगे और ये तय करेंगे वर्तमान विधायक के द्वारा क्षेत्र में किए गए काम।

 

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