जोशीमठ के बाद अब कर्णप्रयाग भी भू धसाव की जद में

जोशीमठ के बाद अब कर्णप्रयाग भी भू धसाव की जद में
जोशीमठ में हो रहे भू धसाव के चलते वहां के लोगों को अपने पीढ़ियों से बसे घरों को छोड़ने को मजबूर होना पड़ रहा है। अभी तक लोग आपदा से उभरे भी नहीं थे कि ऐसा ही एक मामला चमोली जिले के कर्णप्रयाग शहर में देखने को मिला है। यहाँ भी घरों में जोशीमठ जैसी दरारें देखने को मिली हैं, जिससे यहां के लोग सहमें हुए हैं। जोशीमठ से करीब 80 किलोमीटर की दूरी पर अलकनंदा और पिंडर नदी के संगम पर बसा यह शहर धार्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। क्योंकि उत्तराखंड में पांच प्रयागों में से ये एक है। घरों में दरारों के आने की घटना से सरकार और भू संस्थान दोनों ही सक्रिय हो गए हैं। अब तक 48 भवन ऐसे पाए गए हैं जिनकी दीवारों पर दरारें आनी शुरू हो गयीं हैं। जिसे लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विस्तृत भूगर्भिय सर्वेक्षण कराने के निर्देश जारी किये हैं। साथ ही इस मामले पर आई आई टी रुड़की और भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण को जिम्मेदारी सौंपने की कवायत शुरु कर दी गई।

भू धसाव का अलग है कारण
जोशीमठ में हो रहे भू धसाव का कारण वहां के स्थानिय निवासियों द्वारा वहां हो रहे टनल निर्माण को बताया जा रहा था। वहीं वैज्ञानिकों द्वारा मलवे के पहाड़ मे हो रहे अनियंत्रित निर्माण को बताया गया लेकिन कर्णप्रयाग में घरों में दरारों का कारण भिन्न बताया जा रहा है। क्षेत्रिय विधायक अनिल नौटियाल की मानें तो इस क्षेत्र में पूर्व में भी सड़क निर्माण के समय घरों को क्षति पहंुची थी। इसके अलावा अलकनंदा और पिंडर नदियों के संगम पर बसे इस शहर को इन दोनों नदियों द्वारा हो रहे कटाव को भी वजह माना जा रहा है। हालांकि इसके भूगर्भीय सर्वेक्षण के बाद ही सही कारणों का पता चल पायेगाा। बहरहाल सरकार अब इस क्षेत्र में हो रहे घरों को नुकसान को देखते हुए जोशीमठ जैसी पुनर्वास की रणनीति अपनाने को कह रही है।

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