शिव की आराधना का सावन मास आज से शुरू

सावन मास की भारत में बहुत महत्ता है, कहा जाता है की इस महीने भगवान शिव की आराधना करने से भगवान शिव भक्तों से प्रसन्न होकर उनपर कृपया बरसते है।

मैदानी क्षेत्रों में गुरुवार से सावन मास शुरू हो गया है, इसी उपलक्ष में श्रद्धालुओं ने मंदिर पहुंचकर जलाभिषेक करके आराधना की और सुख शांति की कामना की । वही पर्वतीय क्षेत्रों में 16 जुलाई से शुरू होगा सावन मास। श्रद्धालुओं इस महीने आराधना करने मंदिर जाएंगे इस उपलक्ष में मंदिरों को लाइट और फूल से सजाया जा रहा है और भक्तों के लिए व्यवस्था भी करी जा रही है।

सावन मास का बड़ा महत्व है। भगवान शिव भक्तों पे कृपया बरसते है,इस पूरे महीने श्रद्धालु शिव की आराधना और जलाभिषेक करते है। इस महीने धतूरा, बेलपत्री, भांग के पत्ते, दूध, काले तिल, और गुड आदि अर्पित करना शुभ माना जाता है। उत्तराखंड के मैदानी क्षेत्रों में लोग पूर्णिमा से सावन मनाते है।

आचार्य डॉ सुशांत राज का कहना है की कई श्रद्धालु सावन की तिथि को लेकर असमंजस में है, साथ ही उन्होंने बताया की सावन मास पूर्णिमा से शुरू होता है। बुधवार रात 12 बजकर 6 मिनट तक आसाढ़ मास का शुक्ल पक्ष रहेगा, जबकि इसके बाद सावन मास का कृष्ण पक्ष शुरू होगा। इसे में रात 12 बजकर7 मिनट गुरुवार से सावन की शुरुआत मानी जाएगी।

 

वही आचार्य शिव प्रसाद ममगई के अनुसार, मैदानी क्षेत्रों में पूर्णिमा से पूर्णिमा तक और पर्वतीय क्षेत्रों में संक्रांति से संक्रांति तक सावन मनाने की परंपरा है। सावन मास का पहला सोमवार 18 जुलाई, दूसरा 25, तीसरा 1 अगस्त और चौथा और अंतिम सोमवार 8 अगस्त को होगा। और सावन मास की शिवरात्रि 26 जुलाई को मनाई जाएगी।।