पाँच सालों में वाहन बड़े लाखों पर पार्किंग एक भी नहीं

शहर की सड़कों लगातार वाहनों की बढ़ोतरी हो रही है, लोग ज्यादा से ज्यादा निजी वाहन का इस्तेमाल कर रहे है। देहरादून में पिछले पाँच साल में तीन लाख से ज्यादा वाहनों की बढ़ोतरी हुई है, पर पार्किंग अभी तक एक भी नहीं बड़ा है।

यहाँ तक की शहर में सिटी-बस, मैजिक और विक्रम स्टैन्ड भी नहीं हैं। जिसकी वजह से इन वाहनों का संचालन सड़क के किनारे हो रहा है। इससे ट्रैफिक व्यवस्था और खराब होती जा रही है और रोज सड़कों पर लंबा जाम लगा रहता है जिससे लोगों को रोज जूझना पड़ता है।

उत्तराखंड में 30 लाख से ज्यादा वाहन पंजीकृत है ,अकेले देहरादून आरटीओ में 40% से ज्यादा वहाँ पंजीकृत है और पिछले साढ़े चार सालों में तीन लाख से ज्यादा वाहन पंजीकृत हुए है।

राजधानी होने के कारण यहाँ से रोज अनेक वाहन गुजरते है और मसूरी जेसे पर्यटक स्थल जाने के लिए भी लोग भीतरी मार्गों का ही इस्तेमाल करते है लेकिन दून शहर के भीतर पार्किंग की व्यवस्था नहीं है।

घंटाघर में स्थित एमडिडिए के कॉम्प्लेक्स और राजीव गांधी कॉम्प्लेक्स में पार्किंग की व्यवस्था तो हो लेकिन वाहनों की संख्या कई अधिक है, इस कारण लोग सड़कों के किनारे वाहन खड़े करते है।

इससे ट्रैफिक व्यवस्था की लड़खड़ा रही है, शहर में रोजाना वाहन रेंग-रेंग के चल रहे है।