जहां गूंजते थे कभी महिलाओं के गीत अब है वहा निर्माणों का शोर

सोशल मीडिया पर एक वीडियो बहुत तेजी से वायरल हो रहा है जिसमे गांव की तीन महिलाएं और एक पुरुष चारा पत्ती लेकर आ रहे थे। हाईवे पर आने पर उन्हें सीआईएसएफ और पुलिस के जवानों ने रोक लिया। जवानों ने चारों को वाहन में बैठने के लिए कहा, जिसके बाद उनमें विवाद हो गया। सोशल मीडिया में लोगों में इसके प्रति काफी आक्रोश देखने को मिल रहा है जिसमें लोगों का कहना है की अब गाँव वालों को खुद के ही जमीन से चारा लाने की मनाही हो रही है। गाँव के लोगों की जमीन को बाहरी लोगों को बेचा जा रहा है और अपने ही लोगों को इससे दूर किया जा रहा है। वीडियो की पीछे की कहानी पता करने पर मालूम चलता है की  टीएचडीसी की ओर से हेलंग के पास राजस्व भूमि को डंपिंग जोन बनाया गया है। यहां पर जमीन का समतलीकरण करने के बाद उसमें कई निर्माण कार्य प्रस्तावित है, जिसका हेलंग गांव के कुछ परिवार विरोध कर रहे हैं। गाँव वालों का कहना है कि यह उनकी गौचर और चारा पत्ती की भूमि है। यह मामला 15 जुलाई का है जो अब सोशल मीडिया में काफी शेयर किया जा रहा है । हेलंग में महिलाओं के साथ पुलिस व महिला जवानों की ओर से किए गए दुर्व्यवहार पर चमोली की महिला जनप्रतिनिधियों ने आक्रोश जताया। उनका कहना है की  पहाड़ के पनघट व गोचर की भूमि में महिलाओं के गीत गूंजते थे वहीं आज बड़ी-बड़ी जल विद्युत परियोजनाओं के निर्माण का शोर है। लोगों को उनके हक-हकूकों से बेदखल किया जा रहा है। और अगर  इसके विरोध में आंदोलन भी करना पड़े तो पीछे नहीं हटेंगे। उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच ने सीएम पुष्कर सिंह धामी को पत्र लिखकर चारा-पत्ती छीनने के मामले में संबंधित अफसरों से माफी मांगने की मांग उठाई । वही वन मंत्री ने रक्षात्मक रुख अपनाते हुए कहा की ग्रामीणों को चारा-पत्ती लाने की कोई मनाही नहीं है और  इस मामले में वन विभाग को कोई लेना-देना नहीं है। कार्रवाई में वन विभाग के कर्मचारी-अधिकारी शामिल नहीं थे।