‘किसी धर्म का अपमान न करने की नसीहत’मानसून सत्र से पहले याद दिलाई आचार संहिता ,संसद

देशभर में लोग अपने धर्मों को लेकर बहुत संवेदनशील होते जा रहे है क्योंकि देशभर में बहुत सारी एसी चीजे  हो रही है जिससे एक-दूसरों के धर्मों को आहत किया जा रहा है ,इसी के चलते संसद में भी धार्मिक टिप्पणियों को लेकर कुछ समय से चल रहे विवाद पर आज सांसदों को इससे बचने की नसीहत दी है । सोमवार से संसद में मानसून सत्र शुरू हो रहा है, सचिवालय ने इससे पहले सांसदों को आचार संहिता याद दिलाई और कहा की सत्र के दौरान कोई भी धार्मिक टिप्पणियाँ नहीं करनी है।

सचिवालय की और आए बयान में कहा गया है कि ‘सभी सदस्यों को सूचित किया जाता है की आचार समिति ने कहा है की सांसदों को आचार संहिता का पालन करना ही होगा। ’ समिति ने और कहा की प्रत्येक सत्र के पूर्व संध्या में आचार संहिता को सदस्यों की जानकारी और अनुपालन के लिए प्रकाशित करवाया जा सकता है इसके लिए उन्होंने सिफारिश की है।

सांसदों से कहा गया है की उनको संविधान की प्रस्तावना में निर्धारित आदर्शों को वास्तविकता में बदलने के निरंतर प्रयास करते रहने चाहिए।

आचार संहिता में कहा गया है की, “राज्य सभा के सदस्यों को अपने ऊपर जनता के विश्वास को बनाए रखने के लिए अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए और लोगों की आम भलाई के लिए अपने जना देश का निर्वाहन करने के लिए पूरी लग्न से काम करना चाहिए। उन्हें संविधान, कानून का उच्च सम्मान करना चाहिए। ” संहिता में यह भी है की संसदीय संस्थाएँ और आम जनता सबसे ऊपर है।

सदस्यों को सचिवालय ने निर्देश दिए है की वो कोई भी एस काम न करें जिससे संसद की छवि खराब हो और उनकी विश्वसनीयता प्रभावित हो, और लोगों के सामान्य कल्याण को आगे बढ़ाने के लिए उन्हें संसद सदस्य के रूप में अपने पद का सही उपयोग करना चाहिए।

 आचार संहिता के अनुसार यह भी कहा गया है की सदस्यों को हमेशा यह देखना चाहिए की उनके निजी वित्तीय हित और उनके परिवार के सदस्यों के हित सार्वजनिक हित के विरोध में नहीं आते है और यदि कभी एस कोई संघर्ष उत्पन्न होता है तो उन्हें इस तरह से संघर्ष को सुलझाना है की जन का हित उससे खतरे में न पड़े।