आखिर कब मजबूत और टिकाऊँ होंगी उत्तराखण्ड की सड़कें

देहरादून , उत्तराखण्ड राज्य मे सड़कें बनने के कुछ समय बाद ही टूट जाती हैं | राज्य के   भीतर बनने वाली  सड़कें एक साल से  ज्यादा नहीं  टिक पाती | सरकार हर साल सड़कों पर कई गुना पैसा खर्च करती हैं |परंतु फिर भी सड़कों में  सस्ते कच्चे माल का इस्तेमाल किया जाता हैं जो हल्की बारिश मे ही टूट जाता हैं | यह बुरा हाल राज्य के सभी डिस्टिको मे हैं | परंतु आज तक इन सड़कों मे कोई सुधार देखने को नहीं मिला |यहा एक साल के भीतर कुछ सड़कों पर स्मार्ट सिटी तो कुछ सड़कों पर पीडब्ल्यूडी ने डामरीकरण किया हुआ हैं |रिसपना से लेकर मोहकमपुर की सड़कों पर करीब एक साल पहले डामरिकरण हुआ | पर एक साल के अंदर की इस सड़क मे गड्डे बन गए |

 

 

 अल्मोड़ा

जिले के हावलबाग ब्लॉग में मनान  सिलगिनीय सड़क खस्ताहालत मे हैं | कई स्थानों मे डामर पड़ा हुआ वह भी उखड़ चुका हैं | अल्मोड़ा के धोलादेवी  ब्लॉग के कई गावों अभी भी कच्ची सड़कों को पक्की नहीं किया गया हैं | यह बात धोलादेवी ब्लॉग के दन्या  क्षेत्र के मुनोली गाँव की हैं जहा बिना मतलब का रोडों मे बुलडोजर चला कर लोगों  भारी नुकसान हुआ | जिसकी आज तक ना तो कोई भरपाई हो पाई और ना ही सड़क आज तक पक्की हो पाई हैं | कच्ची सड़कों की भरपाई ना  होने की वजह से रोडों मे हल्की बारिश के कारण मलवा आ जाता हैं | तथा पहाड़ होने की वजह से बार बार पहाड़ों से पत्थर गिरने का भय हमेशा बना रहता हैं | इसका सबसे अधिक प्रभाव स्कूल के बच्चों तथा गाँव के अन्य लोगों पर पड़ता हैं न तो बच्चे स्कूल जा पाते हैं और  न गाँव का आदमी अपने रोजगार में |