NEET PG Counselling 2021: फोर्डा ने की लिखित माफी कि मांग, डॉक्टरों की जारी रहेगी हड़ताल

नीट पीजी काउंसलिंग 2021 में देरी के कारण लगातार रेजिडेंट डॉक्टर विरोध कर रहे हैं। एम्स-दिल्ली के रेजिडेंट डॉक्टरों ने नीट-पीजी काउंसलिंग में देरी को लेकर किए गए एक विरोध मार्च के दौरान डॉक्टरों पर पुलिस कार्रवाई के खिलाफ मंगलवार को प्रदर्शन किया। वहीं, मंगलवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने रेजिडेंट डॉक्टरों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। बैठक के बाद उन्होंने कहा कि वह खुद भी चाहते हैं कि नीट पीजी काउंसलिंग 2021 जल्द ही शुरू हो लेकिन मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन होने के कारण काउंसलिंग शुरू नहीं हो पा रही है। 6 जनवरी, 2022 को सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई है। भारत सरकार उससे पहले अपनी रिपोर्ट कोर्ट में जमा कर देगी।

नहीं हो पा रही काउंसलिंग शुरू

हालांकि,  फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (फोर्डा) ने प्रदर्शन मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा कि हड़ताल अभी भी जारी रहेगी। इस संबंध में फोर्डा के अध्यक्ष डॉ मनीश ने कहा कि हड़ताल अभी भी जारी है। हम आईटीओ में रेजिडेंट डॉक्टरों के सोमवार के विरोध के दौरान पुलिस की बर्बरता के लिए लिखित माफी की मांग करते हैं। भविष्य की कार्रवाई तय करने के लिए हम आज रात 8 बजे सभी आरडीए के साथ बैठक करेंगे।

एम्स दिल्ली आरडीए ने बुधवार को प्रस्तावित हड़ताल स्थगित की

एम्स दिल्ली के रेजिडेंट डॉक्टर असोसिएशन ने बयान जारी करते हुए कहा कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के साथ हुई बैठक में हमारी सभी मांगों को मान लिया गया है। इसलिए हमारी तरफ से 29 दिसंबर, 2021 को प्रस्तावित हड़ताल को वापिस ले लिया है। सभी सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहेंगी।

सामूहिक इस्तीफे की भी दी थी चेतावनी 

नीट पीजी काउंसलिंग 2021 को जल्द से जल्द शुरू करने की मांग को लेकर फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (फोर्डा) ने बीते रविवार को आधिकारिक बयान जारी करते हुए केंद्र सरकार से मांग की कि सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई को फास्ट ट्रैक करके जल्द से जल्द नीट पीजी काउंसलिंग 2021 को शुरू किया जाए। अगल काउंसलिंग जल्द शुरू नहीं की गई सभी डॉक्टर सामूहिक इस्तीफा दे देंगे। 25 नवंबर,2021 को नीट पीजी काउंसलिंग,2021 शुरू होनी थी, लेकिन अखिल भारतीय कोटे की मेडिकल सीटों पर ओबीसी को 27 फीसदी व ईडब्ल्यूएस छात्रों को 10 फीसदी आरक्षण प्रदान करने के खिलाफ कुछ छात्र सुप्रीम कोर्ट चले गए थे।