कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद पर मुकदमा दर्ज करने का आदेश

सनराइज ओवर अयोध्या नामक पुस्तक में हिन्दुत्व की तुलना बोको हरम और आइएसआइएस से करने के एक मामले में अदालत ने सलमान खुर्शीद के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विवेचना का आदेश दिया है। एसीजेएम शान्तनु त्यागी ने यह आदेश स्थानीय वकील शुभांशी तिवारी की एक अर्जी पर संज्ञान लेते हुए दिया है। उन्होंने थानाध्यक्ष बीकेटी को यह भी आदेश दिया है कि वह एफआइआर की प्रति तीन दिन में अदालत में प्रस्तुत करें। शुभांशी तिवारी का कहना था कि सलमान खुर्शीद वरिष्ठ वकील हैं तथा कई मंत्री पद को भी सुशोभित कर चुके हैं। उनके द्वारा लिखी गई एक पुस्तक सनराइज ओवर अयोध्या को पढ़ा, तो पुस्तक के कुछ अंश विवादस्पद तथा हिन्दू धर्म पर कुठाराघात करने वाले लगे। इस पुस्तक के पृष्ठ संख्या 113 के अध्याय 6 (द) में लिखा है- भारत के जिस सनातन धर्म और मूल हिन्दूत्व की हम बात करते आए हैं, वह भारत के साधु संतो के नाम से पहचाना जाता है। आज उस पहचान को हम कट्टर हिन्दूत्व के बल पर दरकिनार कर रहे हैं। वर्तमान समय में हिन्दूत्व का एक ऐसा राजनीतिक संस्करण ला दिया गया है, जो इस्लामी जेहादी संगठनों आइएसआइएस और बोको हरम जैसा है।

सन 2007 में सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि भगवान राम का कोई अस्तित्व ही नहीं है

शुभांशी का यह भी आरोप है कि लेखक सलमान खुर्शीद द्वारा अपनी पुस्तक के प्रचार तथा उसके विषय में दिए गए साक्षात्कार के समय पुनः हिन्दू धर्म पर घृणित टिप्पणी की गई। जिसमें हिन्दुत्व की तुलना जानवर और हैवान से की गई है। चूकि लेखक एक राजनैतिक पार्टी विशेष की विचारधारा से संबध रखता है और इस पार्टी ने सन 2007 में सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि भगवान राम का कोई अस्तित्व ही नहीं है। ऐसे में प्रभु श्रीराम के अस्तित्व पर प्रश्नचिन्ह लगाने वाले लोग कभी हिन्दू और हिन्दुत्व के बारे में निष्पक्ष होकर अपनी राय व्यक्त नहीं कर सकते हैं। लेखक ने सिर्फ सन 2022 में उत्तर प्रदेश के चुनाव के मद्देनजर अपनी राजनैतिक पार्टी को लाभ पहुंचाने की मंशा से इस पुस्तक को लिखा है। वरना पुस्तक में अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की समीक्षा के साथ तीन तलाक के नियम की आलोचना नहीं की जाती। यदि पुस्तक अयोध्या फैसले पर लिखी गई, तो तीन तलाक, एनआरसी, सीएए व एनपीआर के कानून पर कटाक्ष करने का कोई कारण नहीं था। दरअसल लेखक को यह जानकारी ही नहीं है कि हिन्दुत्व शब्द संस्कृत के त्व प्रत्यय से बना है। यह शब्द हिन्दू होने के गुण को चरितार्थ करता है। हिन्दुत्व एक विचारधारा है। जीवन जीने की कला है। ऐसा सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने कई निर्णयों में कहा है। उनका तर्क था कि हिन्दूत्व हिन्दू नाम का ठीक वैसे ही गुण है, जैसे मातृत्व माता नाम का गुण है। भातृत्व भ्राता नाम का गुण है। राष्ट्रीयता राष्ट्र नाम का गुण है। पितृत्व पिता नाम का गुण है। मानवता मानव नाम का गुण है। धार्मिकता धर्म नाम का गुण है। इस प्रकार हिन्दू और हिन्दुत्व कोई अलग शब्द नहीं है। लेकिन लेखक ने हिन्दू नामक गुण हिन्दुत्व की तुलना जानवर और हैवान से की है।

विवादस्पद लेखन पर अंकुश लगाया जा सके

शुभांशी ने अपनी अर्जी में कहा है कि वह हिन्दू धर्म की है और हिन्दू शब्द के गुण हिन्दुत्व पर विश्वास रखती है। इसलिए अपने धर्म पर कुठाराघात होते देखकर वह अत्यंत ही द्रवित और मानसिक रूप से व्यथित है। उनकी धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। लिहाजा लेखक के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने के साथ ही इस पुस्तक की प्रतियां जब्त करने का भी आदेश दिया जाए। ताकि इस प्रकार के विवादस्पद लेखन पर अंकुश लगाया जा सके। अदालत ने अर्जी में वर्णित तथ्यों व तर्को की विस्तृत सुनवाई के पश्चात यह पाया कि विपक्षी सलमान खुर्शीद के खिलाफ संज्ञेय अपराध का मामला बनता है।