शरद पूर्णिमा आज, चांद की किरण से बरसेगा अमृत

हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा का खासा महत्व होता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, शरद पूर्णिमा आश्विन मास की पूर्णिमा को आती हैं। इस तिथि से शरद ऋतु का आरम्भ होता है। इस दिन चन्द्रमा संपूर्ण और 16 कलाओं से युक्त होता है। । शरद पूर्णिमा को ‘कौमुदी व्रत’, ‘कोजागरी पूर्णिमा’ और ‘रास पूर्णिमा’ के नाम से भी जाना जाता है। इसी दिन श्रीकृष्ण ने महारास रचाया था। कहते हैं शरद पूर्णिमा की रात को चांद की किरणों से अमृत बरसता है। इसी वजह से इस दिन उत्तर भारत में खीर बनाकर रातभर चांदनी में रखने का रिवाज है।

अमृत की बूंदें हैं बरसती

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन समुद्र मंथन से देवी लक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था। मान्यता है की शरद पूर्णिमा की रात्रि में आसमान से अमृत की बूंदें बरसती हैं, इसलिए तो शरद पूर्णिमा की चांदनी रात में खुले आसमान के नीचे खीर रखने की परंपरा है। मान्यता है कि अगली सुबह जो भी व्यक्ति अमृत युक्त इस खीर का सेवन करता है, वह तमाम रोग व व्याधियों से मुक्त होता है।

शरद पूर्णिमा 2021 शुभ मुहूर्त

अश्विन मास की पूर्णिमा तिथि 19 अक्टूबर को मंगलवार शाम 6 बजकर 44 मिनट से प्रारंभ होगी, जो कि 20 अक्टूबर 2021 को रात 08 बजकर 20 मिनट पर समाप्त होगी।