करवा चौथ पर बन रहें शुभ योग, जानें पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

हिंदी पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष कि चतुर्थी तिथि के दिन करवा चौथ का व्रत रखा जाता है। इस साल 24 अक्टूबर को करवा चौथ मनाया जाएगा। इस दिन महिलाऐं अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती है। साथ ही साज श्रंगार करती है। मेहंदी लगाती है। वहीं सास अपनी बहू को सरगी देती है। इस सरगी को खाकर करवा चौथ व्रत करती हैं। ये व्रत निर्जला व्रत होता है। शाम को चंद्र दर्शन के बाद महिलाऐं व्रत खोलती हैं। इसे संकष्टी चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है।

सभी कार्य होते हैं सफल

करवा चौथ का पर्व कार्तिक मास में आता है और हिंदू पंचांग के मुताबिक, कार्तिक मास का आरंभ 21 अक्टूबर से हो रहा है, जबकि 19 नबंवर को कार्तिक मास का समापन होगा। ज्योतिषार्य के अनुसार इस साल करवा चौथ पर रात 11.35 मिनट तक वरियान योग रहेगा। इस योग में सभी कार्य सफल होते हैं। इसके बाद रात रात 01 बजकर 02 मिनट तक रोहिणी नक्षत्र रहेगा।

शुभ मुहूर्त

चतुर्थी तिथि आरंभ – 24 अक्टूबर तड़के 03 बजकर 2 मिनट से शुरू
चतुर्थी तिथि समाप्त – 25 अक्टूबर सुबह 05 बजकर 43 मिनट तक
चंद्रोदय – शाम 07 बजकर 51 मिनट

पूजा विधि

करवा चौथ के दिन ईशान कोण पर भगवान शिव, मां गौरी और गणेश की प्रतिमा या चित्र, जल से भरा लोटा या कलश स्थापित करें। कलश में चावल डाले, अब कलश पर रोली, चावल का टीका और लोटे की गर्दन पर मौली बांधे। अब गौरी की पूजा करें और उन्हें सिंदूर चढ़ाएं।

चार पूड़ी और चार लड्डू को तीन अलग अलग जगह लेकर एक कलश पर, दूसरा करवे पर रखें। तीसरे को अपनी साड़ी के पल्ले में बांधे। अब मां देवी के सामने घी का दीपक जलाकर कथा पढ़ें और अंत में आरती करें। पानी से भरे कलश को रात में चांद देखने पर इसे चांद को अर्घ्य दें। वह व्रत का पारण करें।