खेत बेचकर 10 साल से न्याय के लिए भटक रहा भाई

गोरखपुर : पुलिस कस्टडी में मनीष गुप्ता की मौत का मामला सरकार ने मांगे पूरी कर शांत कर दिया। लेकिन अलीगढ़ में पुलिस कस्टडी में हुई श्यामू की हत्या की लड़ाई भाई रामू दस साल से लड़ रहा है। इस बीच उसे तोड़ने की कोशिश की गई। पैरवी करने पर मुकदमें दर्ज कराये गये। पुलिस के बड़े अधिकारियों ने दबाव भी डाला, लेकिन रामू झुका नहीं। भाई को न्याय दिलाने के लिए खेत बेच कर सुप्रीम कोर्ट में दोषियों को सजा दिलाने की लड़ाई लड़ रहा है।

किया गया टार्चर

अलीगढ़ के थाना क्वार्सी में पुलिस कस्टडी में वर्ष 2012 में श्यामू की मौत हुई थी। मौत के 10 साल बाद भी आरोपी पुलिस कर्मियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। भाई का आरोप है कि उसे बहुत टार्चर किया गया, जिसके चलते 15 अप्रैल 2012 को श्यामू ने पुलिस कस्टडी में दम तोड़ दिया। आरोप है कि श्यामू को जहर दिया गया और हत्या को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गयी।

जांच कराने कि मांग की
श्यामू के हत्यारों को फांसी की सजा दिलाने की पैरवी कर रहे रामू को बंजारा हत्याकांड में फंसाने की भी कोशिश की गई। रामू के खिलाफ थाना जवां में संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जेल में डाल दिया गया था। रामू ने जमानत पर जेल से बाहर आकर मुख्यमंत्री, प्रमुख सचिव गृह और डीजीपी से मिलकर अपना पक्ष रखा और एसआईटी, सीबीसीआईडी से मामले की जांच कराने की मांग की।