टाटा समूह का हुआ एअर इंडिया, सबसे ज्यादा कीमत लगाकर जीती बोली

देश की दिग्गज कंपनी टाटा समूह ने एयर इंडिया की बिड जीत ली है। जिससे एयर इंडिया अब टाटा समूह का हो गया है। एअर इंडिया की बिक्री प्रक्रिया में Tata sons ने सबसे ज्यादा कीमत लगाकर बिड जीत ली है। एअर इंडिया के लिए टाटा ग्रुप (Tata Group) और स्पाइसजेट (SpiceJet) के अजय सिंह ने बोली लगाई थी।

एअर इंडिया की 100 फीसदी बिकेगी हिस्‍सेदारी

निवेश और लोक संपत्ति प्रबंधन विभाग यानी दीपम के सचिव तुहिन कांत पांडे ने ट्विटर पर लिखा कि लेनदेन सलाहकार को एअर इंडिया के विनिवेश के लिए वित्तीय बोलियां मिली हैं। प्रक्रिया अब अंतिम चरण में है। केंद्र सरकार सरकारी स्वामित्व वाली एयरलाइन में अपनी 100 फीसदी हिस्सेदारी बेचना चाहती है। जिसमें एआई एक्सप्रेस लिमिटेड में एअर इंडिया की 100 फीसदी हिस्सेदारी और एअर इंडिया एसएटीएस एयरपोर्ट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड में 50 फीसदी हिस्सेदारी शामिल हैं।

कंपनी का उठाना होगा कर्ज का इतना भार

जनवरी, 2020 में दीपम द्वारा जारी एअर इंडिया के ईओआई के अनुसार, 31 मार्च, 2019 तक एयरलाइन के कुल 60,074 करोड़ रुपए के लोन में, खरीदार को 23,286.5 करोड़ रुपए के लोन की जिम्मेदारी लेनी होगी। बाकी लोन एअर इंडिया एसेट्स होल्डिंग लिमिटेड (एआईएएचएल) को ट्रांसफर होगा, जो एक विशेष इकाई (एसपीवी) है। एअर इंडिया, 2007 में घरेलू विमान सेवा इंडियन एयरलाइंस के साथ अपने विलय के बाद से घाटे में चल रही है।

टाटा ग्रुप ने ही की थी शुरुआत 

Air India की शुरुआत 1932 में टाटा ग्रुप ने ही की थी. टाटा समूह के जे. आर. डी. टाटा (JRD Tata) ने इसकी शुरुआत की थी, वे खुद भी एक बेहद कुशल पायलट थे।

1932 में हुई थी एयरलाइन की शुरुआत

आपको बता दें कि जे आर डी टाटा ने 1932 में टाटा एयर सर्विसेज शुरू की थी, जो बाद में टाटा एयरलाइंस हुई और 29 जुलाई 1946 को यह पब्लिक लिमिटेड कंपनी हो गई थी। 1953 में सरकार ने टाटा एयरलाइंस का अधिग्रहण कर लिया और यह सरकारी कंपनी बन गई। अब एक बार फिर टाटा ग्रुप की टाटा संस ने इस एयरलाइन में दिलचस्पी दिखाई है। अगर इस बात की पुष्टि हो जाती है कि टाटा ने बोली जीत ली है तो करीब 70 साल बाद एक बार फिर एयर इंडिया टाटा ग्रुप के पास  आ जाएगी। टाटा संस की ग्रुप में 66 फीसदी हिस्सेदारी है, और ये टाटा समूह की प्रमुख स्टेकहोल्डर है।