थायराइड के ये हो सकते हैं लक्षण, रखें इन बातों का ध्यान

थायराइड आज के समय में बहुत आम सी समस्या बनती जा रही है। इससे परेशान लोगों कि संख्या रोज़ाना बढ़ती जा रही है। ये एक गंभीर बीमारी है, जो धीरे-धीरे पीड़ित को ग्रस्त कर देती है। थायरॉइड में बीमारी के कारण कई बार ये ग्रंथियां ज्यादा हार्मोन्स रिलीज करने लगती है और कई बार जरूरत से कम। थायरॉइड के कारण मेटाबॉलिज्म की दर धीमी पड़ जाती है। इसका मतलब यह कि आप जो खाना खाते हैं, उसका आपकी एनर्जी की आवश्यकताओं के लिए उचित तरीके से इस्तेमाल नहीं हो पाता है। इसमें हाइपरथायरॉइडिज्म एक ऐसी समस्या है, जिसमें मरीज की थायरॉइड ग्रंथियां सामान्य से ज्यादा थायरॉक्सिन हार्मोन्स बनाने लगती हैं, जिससे मरीज को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता किया जा है।

थायराइड से ग्रसित लोग, इन चीजों का हमेशा ध्यान रखें

  • हर दिन विभिन्न प्रकार के फलों और सब्जियों का सेवन करें।
  • कुछ डेयरी या डेयरी विकल्प लें।
  • आप चाहें तो बीन्स, दालें, मछली, अंडे, मांस और अन्य प्रोटीन भी खा सकते हैं।
  • घी, तेल, या स्प्रेड्स कम मात्रा में खाएं।
  • खूब सारे तरल पदार्थ लें (दिन में कम से कम 6 से 8 गिलास पानी पीएं)
  • दिन में आधा घंटे के लिए ही सही, मगर एक्सरसाइज़ या व्यायाम ज़रूर करें।

ये हो सकते है लक्षण

-हर समय थकान महसूस होना

-जल्दी नींद न आना और देर रात तक जागना

-जल्दी-जल्दी भूख लगना

-ज्यादा खाने के बावजूद तेजी से वजन कम होने लगना

-चिंतित रहना, हाथों में कंपन्न, पसीना आना, सीने में दर्द व सांस लेने में समस्या होना।

-एकाग्रता में कमी होना और आंखों में सूजन आना।

-दिल की धड़कन तेज होना व मांसपेशियों में कमजोरी महसूस होना।

-ज्यादा गर्मी लगना।

-गले के सामने व निचले हिस्से में थायराइड ग्रंथि का बड़ा होना।

-थकान, बालों का झड़ना व डायरिया होना।

बचाव एवं उपचार

– अगर यहां बताए गए लक्षणों में कोई भी लक्षण दिखाई दे तो थायरॉयड की जांच जरूर करवानी चाहिए।

– थायरॉयड की जांच हमेशा किसी विश्वसनीय लैब से करवाएं क्योंकि इसकी रिपोर्ट में गडबडी होने की आशंका रहती है।

– कंसीव करने से पहले हर स्त्री को थायरॉयड की जांच करवा कर उसके स्तर को नियंत्रित करने की कोशिश करनी चाहिए। गर्भावस्था में इसके असंतुलन से एनीमिया, मिसकैरेज, जन्म के बाद शिशु की मृत्यु और शिशु में जन्मजात मानसिक दुर्बलता की आशंका बनी रहती है।

– अगर किसी स्त्री में यह समस्या हो तो डॉक्टर से सलाह के बाद उसे नियमित रूप से दवाओं का सेवन करना चाहिए।

– अगर समस्या ज्य़ादा गंभीर हो तो अंतिम विकल्प के रूप में आयोडीन थेरेपी या सर्जरी का इस्तेमाल किया जाता है।