गांव बना पर्यटन स्थल, लेकिन झेल रहा है शिक्षको की कमी

खबर धमतरी से है।  धमतरी ज़िले का जबर्रा गांव जहां पर पर्यटन को बढ़ावा देने में ज़िले के तत्कालीन कलेक्टर रजत बंसल ने पूरी ताकत झोंक दी थी, प्रशानिक अमला भी पूरी ईमानदारी से उस गांव को संवारने जुट गया था। बहुत तेज़ी से काम भी शुरू कर दिए गए, वहां बाहर से पर्यटकों का आना भी शुरू हो चुका था। लेकिन गांव में स्कूल का बहुत ही बुरा हाल है, पहली कक्षा से 8वीं तक की कक्षाएं संचालित हो रही हैं। लेकिन स्कूल में बच्चों के लिए अलग- अलग कक्षाएं नहीं है, केवल 3 कमरों में बच्चों को एक साथ बैठाकर पढ़ाया जा रहा है। बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षक भी नहीं हैं,  सभी कक्षाओं के लिए केवल 3 शिक्षक ही हैं, जिन्हें एक ही कमरे में कई कक्षाओं के बच्चों को अध्यापन कार्य करवाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

 

भविष्य के साथ कर रहें समझौता

गांव में स्कूल का बहुत ही बुरा हाल है, पढ़ाई में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पहली कक्षा से 8वीं तक की कक्षाएं संचालित हो रही हैं। लेकिन स्कूल में बच्चों के लिए अलग- अलग कक्षाएं नहीं है, केवल 3 कमरों में बच्चों को एक साथ बैठाकर पढ़ाया जा रहा है।उन तीन कमरों में ही बच्चो को अपने जीवन के भविष्य के साथ समझौता करना पड़ रहा है। बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षक भी नहीं हैं,  सभी कक्षाओं के लिए केवल 3 शिक्षक ही हैं, जिन्हें एक ही कमरे में कई कक्षाओं के बच्चों को अध्यापन कार्य करवाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।