विनोद राय को आईडीएफसी शेयरधारकों ने गैर-कार्यकारी नियुक्ति देने का प्रस्ताव किया खारिज

कंपनी की बुधवार को हुई 24वीं सालाना आम बैठक में गैर-स्वतंत्र गैर-कार्यकारी निदेशक के रूप में राय की नियुक्ति को लेकर मतदान हुआ। IDFC ने एक बीएसई फाइलिंग में कहा है कि राय को पर्याप्त वोट नहीं मिले इसलिए उन्हें बोर्ड में ऑफ डायरेक्टर में शामिल करने के लिए लाया गया साधारण प्रस्ताव पास नहीं हो सका।

वित्तीय कंपनी आईडीएफसी लि. के शेयरधारकों ने बुधवार को भारत के पूर्व नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) विनोद राय को कंपनी का गैर-कार्यकारी निदेशक फिर से नियुक्त किये जाने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया। राय फिलहाल कंपनी के गैर-कार्यकारी चेयरमैन हैं।

राय के पक्ष में नहीं पड़े पर्याप्त वोट

IDFC ने एक बीएसई फाइलिंग में कहा है कि राय को पर्याप्त वोट नहीं मिले इसलिए उन्हें बोर्ड में ऑफ डायरेक्टर में शामिल करने के लिए लाया गया साधारण प्रस्ताव पास नहीं हो सका। उनके पक्ष में सिर्फ 37.11 फीसदी वोट पड़े। जबकि साधारण प्रस्ताव के पारित होने के लिए 50 फीसदी वोटों की जरूरत होती है। शेयरहोल्डरों ने जैमिनी भगवती और अनिल सिंघवी की स्वतंत्र निदेशक के तौर पर नियुक्ति को मंजूरी दे दी है।

कंपनी का प्रबंधन निवेशकों के निशाने पर

22 सितंबर को आईडीएफसी ( IDFC Ltd ) के एजीएम के पिछले सप्ताह कंपनी के प्रबंधन को निवेशकों की कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा था। निवेशक कंपनी की परिसंपत्तियों के विनिवेश की धीमी गति से बेहद नाराज था. इनमें बैंक और म्यूचुअल फंड में कंपनी के निवेश भी शामिल हैं। इसके अलावा IDFC Ltd की कुछ एंटिटी के मर्जर पर भी कोई तय अवधि नहीं दी गई थी। इससे भी निवेशक नाराज थे। उस वक्त चेयरमैन के तौर पर राय ने निवेशकों से कहा था कि कंपनी का काफी जटिल कॉरपोरेट स्ट्रक्चर है। इसमें तीन कंपनी हैं। इसमें एक नॉन ऑपरेटिंग फाइनेंस कंपनी, IDFC परियोजनाएं और IDFC फाउंडेशन शामिल हैं। नॉन ऑपरेटिंग एंटिटी में कई फाइनेंशियल सर्विसेज बिजनेस शामिल हैं। इनमें बैंक और फाइनेंस कंपनी शामिल हैं। बीएसई फाइलिंग के मुताबिक IDFC First Bank में IDFC Ltd. की 36.5 फीसदी हिस्सेदारी है।

राय का दूसरा कार्यकाल 30 जुलाई 2021 को खत्म होना था। लेकिन उन्होंने इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के पद से इस्तीफा दे दिया था। बाद में उन्हें 25 मई 2021 से गैर एग्जीक्यूटिव और गैर स्वतंत्र निदेशक के तौर पर कंपनी में नियुक्ति दी गई थी। शेयर होल्डर्स ने AGM में दूसरे सभी प्रस्तावों को मंजूरी दी। इससे पहले, ऐसी खबरें थीं कि कुछ निवेशकों ने राय को नॉन-इंडिपेंडेंट गैर-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के रूप में फिर से नियुक्त करने के प्रस्ताव को लाल झंडी दिखा दी थी।

अलग-अलग पदों पर काम करने का अनुभव

इस साल मई में, IDFC ने राय को नॉन-इंडिपेंडेंट गैर-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के रूप में नियुक्त किया था, जिसके लिए शेयर होल्डर्स की मंजूरी मिलनी बाकी थी। विनोद राय कम्पट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल ऑफ इंडिया (CAG) थे और उन्हें केंद्र और राज्य सरकारों दोनों में कई अलग-अलग पदों पर काम करने का लंबा अनुभव है। राय सरकार की तरफ से गठित बैंक बोर्ड ब्यूरो के अध्यक्ष भी थे। इसके अलावा, राय स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), ICICI बैंक, IDBI बैंक और भारतीय जीवन बीमा निगम सहित कई बोर्डों में डायरेक्टर रहे हैं।