महंत नरेन्द्र गिरि का जाना हिन्दुत्व को क्षति

महंत का दुखद अन्त, जी हां हम बात कर रहे हैं अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रहे महंत स्वामी नरेन्द्र गिरि की। नरेन्द्र गिरि ने सोमवार को अपने कमरे में पंखे से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी और छोड़ गए थे एक सुसाइड नोट। लेकिन छोड़े गए सुसाइड नोट ने भी की सवाल खड़े कर दिए मसलन 8 पेज के सुसाइड नोट पर अपने ही शिष्य 40 वर्षीय आनन्द गिरि को आत्महत्या का कारण बताया लेकिन उनके अन्य शिष्यों का कहना है कि नरेन्द्र गिरि यदा कदा ही एक दो लाइनें लिखते थे फिर 8 पेज लिखना उन लोगों के गले नहीं उतर रहा। हालांकि सोमवार को ही हरिद्वार से उन्हें हिरासत में ले लिया गया और मंगलवार को यूपी पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। आरोपी महंत आनन्द इसे एक बड़ी साजिश करार दे रहे हैं। कौन है आनन्द गिरि और उनका अपने गुरू नरेन्द्र गिरि से क्या विवाद था वो भी जान लीजिए।

बड़े हनुमान मन्दिर के छोटे महन्त थे आनन्द गिरि

खुद को ‘घुमंतू योगी’ बताने वाले आनंद गिरि की पहचान प्रयागराज के संगम किनारे स्थित प्रसिद्ध बड़े हनुमान मंदिर के छोटे महंत के रूप में भी होती है। आनंद गिरि, बाघमबारी गद्दी के महंत, बड़े हनुमान मंदिर के मुख्य पुजारी और अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रहे महंत नरेंद्र गिरि के शिष्य रहे है। आनंद गिरि के बारे में कहा जाता है कि उनका बचपन से ही धर्म की तरफ गहरा झुकाव रहा है। बकौल आनंद गिरि उन्हें 12 साल की उम्र में ईश्वर का संदेश मिला था, जिसके बाद वह आध्यात्मिक मार्ग पर पड़े। आनंद गिरि देश-विदेश में जाकर लोगों को योग सिखाते हैं। एक दिन महंत नरेंद्र गिरि हरिद्वार आए हुए थे। यहाँ उनकी मुलाकात आनंद गिरि से हुई। महंत नरेंद्र गिरि जल्द ही आनंद गिरि से प्रभावित हो गए। महंत नरेंद्र गिरि ने आनंद गिरि में एक अच्छे शिष्य के सारे गुण देखे। इसके बाद वह आनंद गिरि को अपने साथ प्रयागराज लेकर आ गए। इसके बाद साल 2007 में आनंद गिरि निरंजनी अखाड़े से जुड़े और इसी अखाड़े के महंत बने।

आनन्द गिरि का विवादों से रहा है नाता

एक बार महंत आनंद गिरि की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी। इस फोटो में आनंद गिरि एक प्लेन में बैठे दिखाई दे रहे है, और उनके बगल में एक पेय पदार्थ रखा हुआ है। इस फोटो के साथ किसी ने लिखा था कि, ‘यह मंदिर में भक्तों द्वारा चढ़ाये गये पैसे से विदेश यात्रा पर जाते है और मदिरा का सेवन करते है।’ हालांकि बाद में आनंद गिरि ने सफाई देते हुए इसे एप्पल का जूस बताया था। इसके अलावा महंत आनंद गिरि को एक बार ऑस्ट्रेलिया के सिडनी शहर में महिलाओं से उनके बेडरूम में मारपीट करने के आरोप में गिरफ्तार किया जा चुका है। हालांकि तब महंत नरेंद्र गिरी ने महंत आनंद गिरि का बचाव करते हुए कहा था कि, ‘पीठ थपथपाकर आशीर्वाद की परंपरा को अमर्यादित आचरण करार देते हुए उन्हें आरोपी बनाया गया है’। इसके अलावा महंत आनंद गिरि पर 2016 में नव वर्ष के दिन रूटी हिल स्थित एक घर में पूजा में हिस्सा लेने के दौरान शयनकक्ष में महिला से मारपीट करने का आरोप भी लग चुका है। आनंद गिरि ने महंत नरेंद्र गिरि पर मठ और हनुमान मंदिर से होने वाली करोड़ों रुपये की आमदनी में हेरफेर समेत कई गंभीर आरोप लगाए थे। आनंद गिरि के व्यवहार से दुखी होकर महंत नरेंद्र गिरि ने उन्हें आश्रम से निष्कासित कर दिया था। इसके बाद जब अखाड़ों ने हस्तक्षेप किया तो आनंद गिरि ने महंत नरेंद्र गिरि के पैरों में गिरकर माफ़ी मांगी थी। लेकिन दोनों के बीच पहले जैसा रिश्ता नहीं रहा था। 20 सितंबर 2021 को महंत नरेंद्र गिरि का शव उनके कमरे में मिला। शुरूआती जाँच में पुलिस ने इसे आत्महत्या का मामला बताया था। महंत नरेंद्र गिरि ने आत्महत्या करने से पहले सुसाइड नोट भी छोड़ा था। इस सुसाइड नोट में महंत नरेंद्र गिरि ने अपने शिष्य आनंद गिरी और कुछ अन्य लोगों को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया था। इस मामले में पुलिस ने आनंद गिरी को गिरफ्तार किया है और मामले की जांच कर रही है। नरेन्द्र गिरि की मौत अपने पीछे कई सवाल छोड़ गई है जिसके जवाब खोजने के लिए पुलिस को खासी मशक्कत करनी पड़ेगी।