आज है अश्र्विन कृष्ण प्रतिपदा तिथि, रखें इन बातो का ध्यान

आज मङ्गलवार, आश्विन कृष्ण प्रतिपदा तिथि है।
आज उत्तराभाद्रपद नक्षत्र, “आनन्द” नाम संवत् 2078 है

  • आज प्रतिपदा तिथि का श्राद्ध है।
  • श्राद्ध कर्म करने और ब्राह्मण भोजन का समय प्रातः 11:36 बजे से 12: 24 बजे तक का है।
  • इस समय को कुतप वेला कहते हैं। यह समय मुख्य रूप से श्राद्ध के लिए प्रशस्त है।
  • लोकाचार परम्परा अनुसार जो श्राद्ध पक्ष के प्रथम दिन पूर्णिमा को श्राद्ध में मिलाते हैं, गलत है।
  • पितृपक्ष में मृत्यु तिथि वाली तिथि के दिन ही श्राद्ध में मिलाना चाहिए। (श्राद्ध चिन्तामणि)
  • कम से कम तीन पीढ़ी तक के श्राद्ध अवश्य करना चाहिए।
  • यमलोक या स्वर्गलोक में रहने वाले पितरों को भी तब तक भूख – प्यास अधिक होती है, जब तक वह पिता, पितामह या प्रपितामह पद पर रहते हैं।
  • जो पितृ कहीं जन्म ले चुके हैं, उनका भाग दिव्य पितृ आकर ग्रहण कर उस जीव को तृप्ति पहुंचाते हैं।
  • अग्निष्वात्त, बर्हिषद्, आज्यप, सोमप, रश्मिप, उपहूत, आयन्तुन, श्राद्धभुक् तथा नान्दीमुख – ये नौ दिव्य पितर बताए गए हैं।
  • अमावस्या के दिन वंशजों द्वारा किए गए श्राद्ध से पितृ एक मास तक तृप्त रहते हैं।
  • पितृ पक्ष में जो मनुष्य मृत्यु तिथि पर पितरों के लिए श्राद्ध करते हैं, उससे पितरों को एक वर्ष तक तृप्ति बनी रहती है।
  • गया तीर्थ में एक बार श्राद्ध कर देने से सभी पितृ सदा के लिए तृप्त हो जाते हैं।