पितृपक्ष में भूलकर भी न करें ये गलती

हिंदू कैलेंडर के अनुसार भाद्रपद महीने की पूर्णिमा तिथि से पितृ पक्ष शुरू होते हैं और अगली अमावस्या तक पितरों को श्राद्ध अर्पित किया जाता है। इस साल पितरों की शुरुआत आज से हो रही है जो कि 6अक्टूबर तक चलेगी। अब अगले 15 दिनों तक सभी अपने पूर्वजों को याद करेंगे और श्राद्ध अर्पित कर उनकी आत्‍मा की शांति के लिए पिंडदान, तर्पण, श्राद्ध कर्म करेंगे। हिंदू धर्म में पितृ पक्ष को बहुत अहम माना गया है। इस दौरान श्राद्ध करने से पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है और जिंदगी में सफलता, सुख-समृद्धि भी हासिल होती है। वहीं श्राद्ध न करने पर पूर्वज नाराज हो जाते हैं और जीवन में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। धर्म पुराणों में पितृ पक्ष को लेकर कुछ नियम बताए गए हैं, अगले 15 दिनों तक नियमों का पालन करना बहुत जरूरी होता है।

क्या है नियम

  1. श्राद्ध कर्म के दौरान लोहे का बर्तन का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। मान्यता है कि पितृपक्ष में लोहे के बर्तन इस्तेमाल करने से परिवार पर अशुभ प्रभाव पड़ता है। इस दौरान पीतल, तांबा या अन्य धातु से बने बर्तनों का इस्तेमाल करना चाहिए।
  2. पितृपक्ष में श्राद्ध के दौरान तेल का प्रयोग नहीं करना चाहिए। इसके अलावा दूसरों के घर का बना खाना और पान का सेवन नहीं करना चाहिए। श्राद्ध पक्ष में लहसुन, प्याज से बना भोजन नहीं करना चाहिए। इस दिन ब्राह्माणों को भोजन करवाना शुभ होता है।
  3. पितृपक्ष में किसी तरह का कोई शुभ कार्य नहीं होता है। किसी तरह की नई चीज को नहीं खरीदना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान अपने पूर्वजों को याद करते हैं और उनकी आत्मा की शांति के लिए पूजा करते हैं।
  4. पितृपक्ष में जो भी पुरुष श्राद्ध कर्म करते हैं उन्हें इस दौरान बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए। मान्यता है कि बाल और दाढ़ी कटवाने से धन की हानि होती है क्योंकि यह शोक का समय माना जाता है।

5. पितृपक्ष में घर पर सात्विक भोजन बनाना सबसे उत्तम होता है। अगर आपको पितरों की मृत्यु तिथि याद है तो पिंडदान भी करना चाहिए। पितृपक्ष के आखिरी दिन पिंडदान और तर्पण करना चाहिए।

6. सूर्यास्‍त के बाद श्राद्ध करना अशुभ माना जाता है। इन दिनों में लौकी, खीरा, चना, जीरा और सरसों का साग नहीं खाना चाहिए। जानवरों या पक्षी को सताना या परेशान भी नहीं करना है।