टाटा ग्रुप ने एयर इंडिया के लिए लगाई बोली 

भारत की सरकारी विमान कंपनी एयर इंडिया (Air India) के विनिवेश के लिए टाटा ने लगाई है बोली । बोली लगाने के लिए वालों में टाटा समूह (Tata Group) और स्पाइसजेट (SpiceJet) के प्रमोटर अजय सिंह (Ajay Singh) शामिल हैं। एयर इंडिया को खरीदने वाले सफल बिडर को घरेलू हवाई अड्डों पर 4,400 घरेलू और 1,800 अंतरराष्ट्रीय लैंडिंग और पार्किंग अलोकेशन का कंट्रोल दिया जाएगा। सफल बोली लगाने वाली कंपनी को एयर इंडिया की सस्ती एविएशन सर्विस एयर इंडिया एक्सप्रेस का भी सौ प्रतिशत कंट्रोल मिलेगा। टाटा ग्रुप ने एयर एशिया इंडिया के जरिए एयर इंडिया के लिए बोली लगाई है और इसके अधिकारी पिछले कुछ महीनों में पूरे भारत में एयरलाइन साइट्स का दौरा कर रहे हैं।

Air India की खरीद में कई कंपनियों ने रुचि दिखाई है। इसमें Tata Group का नाम सबसे आगे है। Air India की शुरुआत 1932 में टाटा ग्रुप ने ही की थी। टाटा समूह के जे. आर. डी. टाटा (JRD Tata) ने इसकी शुरुआत की थी, वे खुद भी एक बेहद कुशल पायलट थे। अब Tata Group ने इसकी खरीद के लिए फाइनेंशियल बिड जमा की है।

पहले भी की गई प्राइवेटाइजेशन की कोशिश

Air India के प्राइवेटाइजेशन की कोशिश पहले भी की गई है। सबसे पहले इसे फिर से प्राइवेट हाथ में देने का विचार 2000-2001 के दौरान आया था। लेकिन तब बात नहीं बनी। फिर 2007 में इसमें Indian Airlines का विलय कर दिया गया। इस विलय के बाद से Air India का एक बुरा दौर शुरू हो गया। उस समय दोनों कंपनियों का कुल घाटा 2006-07 में करीब 7.7 अरब रुपये था, जो 2009 में बढ़कर 72 अरब रुपये तक पहुंच गया। इसके बाद तब की यूपीए सरकार ने Air India को बेल आउट पैकेज देकर बचाने की कोशिश की, लेकिन इसे बचाया नहीं जा सका। बाद में वर्ष 2017 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने फिर से इसके प्राइवेटाइजेशन की रूपरेखा बनाई. मार्च 2018 में सरकार ने इसके लिए कंपनियों से रुचि पत्र (EOI) मंगवाए लेकिन तब भी इसे हाथों-हाथ नहीं लिया गया और ये कोशिश नाकाम रही। फिर कोरोना महामारी के चलते इसके प्राइवेटाइजेशन में देरी हुई। लेकिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2021-22 का बजट पेश करते हुए चालू वित्त वर्ष में इसके विनिवेश का लक्ष्य रखा है।