कोरोना पीडि़त व्यक्ति की आत्महत्या भी कोविड मौत माना जाए : सुप्रीम कोर्ट

कोरोना काल में कई लोगों की जान चली गई, कई परिवार अनाथ हो गए. ऐसे परिवारों को सरकारी मदद दिलाने के लिए देश का सुप्रीम कोर्ट आगे आया है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से निर्देश जारी कर  कहा है कि कोरोना पीडि़त व्यक्ति द्वारा की गई आत्महत्या को भी कोरोना से मौत माना जाना चाहिए। सरकार कोरोना से मौत के मामले में जारी दिशानिर्देशों में इसे भी कोरोना से मौत में शामिल करने पर विचार करे। कोर्ट ने कोरोना से मौत के मामले में सरकार द्वारा तय किये गए दिशानिर्देशों पर संतुष्टि जताते हुए, सरकार से कुछ पहलुओं पर विचार करने को कहा है।

SC ने केंद्र को जारी किया निर्देश

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सोमवार को केंद्र सरकार (Central Government) से कहा कि अगर कोई कोविड-19 मरीज, अस्पताल या इन-पेशेंट सुविधा में 30 दिनों से अधिक समय तक भर्ती रहता है और फिर उसकी मौत हो जाती है तो उसे भी कोविड-19 की मृत्यु के रूप में माना जाएगा या फिर कोरोना से परेशान होकर किसी ने आत्महत्या की हो तो उसे कोविड-19 (Covid-19) से हुई मौत माना जाए कोर्ट ने इस बारे में राज्यों को नए दिशानिर्देश जारी देने के लिए कहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने कहा कि हमने आपका शपथपत्र देखा है, लेकिन कुछ बातों पर और विचार करना चाहिए। शपथपत्र में केंद्र के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने कोविड से मरे लोगों को आसानी से प्रमाणपत्र देने के संबंध में दिशानिर्देश बनाए हैं। यह निर्देश राज्यों को भेजे गए हैं। दरअसल, केंद्र ने कोर्ट को जो शपथपत्र सौंपा है उसमें कहा गया है कि जहर खाने या अन्य दुर्घटना के कारण अगर मृत्यु होती है तो चाहे कोविड-19 उसमें एक कारण क्यों न हो, उसे कोविड से हुई मौत नहीं माना जाएगा। कोर्ट के निर्देश के बाद स्वास्थ्य मंत्रालय और इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने 3 सितंबर को नई गाइडलाइन जारी की। जिसमें कहा गया है कि कोरोना की पुष्टि होने के बाद अगर कोई मरीज हॉस्पिटल से डिस्चार्ज भी हो जाए तो भी टेस्ट के 30 दिनों के भीतर बाहर मौत होने पर कोविड डेथ माना जाएगा।