वायरल बुखार का कहर, तीन गुना अधिक हो गई पैरासिटामॉल की बिक्री

उत्तर प्रदेश के कई इलाके इस वक्त, डेंगू, मलेरिया और वायरल बुखार की चपेट में हैं। लखनऊ शहर में  बुखार का कहर बढ़ता जा रहा है। जिसका मेडिकल स्टोरों पर दवाओं की बिक्री में बढ़ोतरी इसका सबूत है। अमीनाबाद मेडिसिन मार्केट से लेकर रिटेल मेडिकल स्टोरों पर पैरासिटामॉल और एंटीबायटिक की बिक्री तीन गुना हो गई है। डॉक्टर की सलाह के अलावा सीधे मेडिकल स्टोर से दवा खरीदने वालों में भी दोगुना इजाफा हो गया है।

मेडिकल स्टोरों पर पैरासिटामॉल खरीदने वालों का ब्योरा दर्ज किया जाता है। इसमें यह सामने आया है कि पैरासिटामॉल की बिक्री का ग्राफ कोरोना की दूसरी लहर में हुई बिक्री के बराबर पहुंच गया है। फिलहाल पैरासिटामॉल की डोलो टैबलट सबसे ज्यादा बिक रही है। ज्यादातर लोग वायरल फीवर होने पर एक-दो दिन तक डॉक्टर के पास नहीं जाते और खुद ही दुकान से खरीदकर पैरासिटामॉल खाते हैं। इस कारण बिक्री ज्यादा हो रही है।

खुद से खरीद रहे एंटीबायटिक
मौजूदा सयम में लोगों को पांच से सात दिन तक बुखार हो रहा है। ऐसे में डॉक्टर 60 फीसदी से ज्यादा मरीजों को एंटीबायटिक लिख रहे हैं। इस कारण एजिथ्रोमाइसीन समेत कई एंटीबायटिक दवाओं की बिक्री भी दोगुना हो गई है। पहले लोग सिर्फ बुखार के लिए पैरासिटामॉल खरीदते थे, लेकिन अब एंटीबायटिक भी खरीद रहे हैं, हालांकि ज्यादातर मेडिकल स्टोर संचालक लोगों को पहले दिन ही एंटीबायटिक न लेने के लिए मना करते हैं।

फायदे की जगह नुकसान भी पहुंचा सकती है एंटीबायटिक

डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायटिक दवा नहीं लेनी चाहिए। बुखार कई तरह के होते हैं। सिर्फ बैक्टीरियल इंफेक्शन में एंटीबायटिक कारगर होती है, जबकि वायरल इंफेक्शन में यह काम नहीं करेगी। ऐसे में डॉक्टर भी पहले पैरासिटामॉल लिखते हैं, फिर लक्षणों और जांच के आधार पर एंटीबायटिक तय करते हैं। मरीज खुद से एंटीबायटिक दवा लेंगे तो फायदे की जगह नुकसान हो सकता है।