अनुच्छेद को समाप्त हुए हो गए तीन साल अभी भी वही उतना ही विकास   

 

आज अनुच्छेद 370 को समाप्त हुए तीन साल पूरे हो चुके है लेकिन इस अनुच्छेद को समाप्त करते समय जो वादे किए गए थे उन पर कोई कार्य नहीं किया गया 
 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 को समाप्त किया गया था और इस अनुच्छेद को समाप्त करते हुए केंद्र सरकार ने भरोसा दिया था कि जम्मू कश्मीर और लद्दाख के क्षेत्रों में विकास कार्यों को नया बल मिलेगा  लेकिन इस भरोसे को कितना निभाया गया वह स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है 
आज 370 के हटने के तीन साल बाद  भी जमीनी स्थितियों पर गौर करेंगे तो उपलब्धि या विकास के नाम पर ऐसा कुछ भी नहीं दिख रहा है 
पब्लिक हेल्थ सेंटर कुछ जगहों पर बनाने की घोषणा की गई थी. कुछ जगहों पर बनाया भी गया. लेकिन वहां पर मेडिकल सुविधाएं नहीं मिल रही हैं. जिले के कई दफ्तरों में अधिकारी तैनात नहीं हैं. कुछ विभागों में तो एक ही आदमी के पास दो-दो जिलों की जवाबदेही है
अन्य उदाहरण स्वरूप पुलवामा जिले को ही देख लीजिए. निर्माण और विकास के पैमाने पर पुलवामा काफी पिछड़ा हुआ जिला माना जाता है. आज भी यहां की स्थितियां नहीं बदली हैं. यह एक संवेदनशील जिला है. और यह संवेदनशीलता ही विकास के रास्ते में बाधा बन रही है.
देश को स्वच्छता का पाठ पढ़ने वाली सरकार को यह जिलों का कूड़ा नहीं दिखाई देता  यहा जिले की प्रमुख सड़क, सर्कुलर रोड, पर कचरा भरा पड़ा रहता है. इस गंदगी की वजह से आसपास के लोगों को काफी परेशानी होती है  
पुलवामा जिले के सिविल सोसाइटी के अध्यक्ष मोहम्मद अल्ताफ कहते हैं कि सरकार ने भरोसा दिया था कि पांच अगस्त 2019 के बाद जिले में विकास की गतिविधियां बढ़ेंगी. लेकिन जमीन पर तो ऐसा दिखता नहीं है. लगभग सभी वादे अधूरे हैं. उन्होंने कहा कि जिले के युवाओं को रोजगार देने की बात कही गई थी, लेकिन वह तो सरकार की प्राथमिकता ही नहीं है  कई कांग्रेस कार्यकर्ता का कहना है की यह केवल भाजपा का एजेंडा था जिसमें उन्होंने अनुच्छेद 370 को हटाना और 35ए को समाप्त करके अपना वोट बैंक सुरक्षित कर लिया 

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