”  जल्द उत्तराखंड में महक बिखेरेगा अगरवुड “

क्या है अगरु ( अगरवुड)  :

प्राचीन काल से ही लोग अगरु ( अगरवुड) का उपयोग एक जड़ी- बूटी के रूप में करते आ रहे है इसे कई बीमारियों के इलाज के लिए भी उपयोग किया जाता है  इसकी लकड़ी से गोंद की भांति एक कोमल पदार्थ निकलता है जो अगरबत्ती बनाने से लेकर शरीर में मलने के बेहद काम आता है अगरु  का वृक्ष विशाल तथा सदा हरा भरा रहता है पेट से संबंधित रोगों में लाभकारी ये अगरु बुखार उतारने में भी लाभकारी होता है जिस इलाके में अगरवुड के जंगल पाए जाते हैं, वहां हरियाली होने के साथ ही वातावरण में बहुत अधिक खुशबू रहती है और आस पास महकता रहता है अगरवुड की लंबाई औसतन 18 से 30 मीटर के बीच होती है, जबकि इसका तना डेढ़ मीटर से लेकर ढाई मीटर व्यास वाला होता भारत समेत चीन, कंबोडिया, सिंगापुर, मालदीव, भूटान, बांग्लादेश, जैसे दक्षिण एशिया के कई देशों में अगरवुड का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है। आसाम, मणिपुर और केरल जैसे राज्यों में इसका उत्पादन हो रहा है। त्रिपुरा का तो ये राज्य वृक्ष है

”  जल्द उत्तराखंड में महक बिखेरेगा अगरवुड ”
अब त्रिपुरा के राज्य वृक्ष का उत्तराखंड में भी उत्पादन शुरू किया जा रहा है  प्रयोग के लिए अगरवुड की नर्सरी तैयार की जा रही है फिलहाल यह प्रयोग सफल रहा है अगरवुड की छाल भी काफी महँगी बिकती हैं तो न केवल उत्तराखंड मेहकेगा बल्कि यहाँ की आमदनी पर भी इजाफा होगा।