पहाड़ में डॉक्टर पूरे मैदान में है पद खाली

एक समय था जब पर्वतीय  इलाकों में डॉक्टरो कि कमी की वजह से पहाड़ के लोगों को समय पर सही इलाज नहीं मिल पता था और कई लोगों को पहाड़ों से मैदानी अस्पतालों में लाया जाता था पर आज ये स्थिति मैदानी इलाकों में देखने को मिल रही है  पर्वतीय इलाकों में सरकारी अस्पतालों में सारे पद भर चुके है पर मैदानी इलाकों में 300 पद खाली है सरकार मैदान में पदों को भरने क लिए पहाड़ों के लंबे समय से कार्यरत डॉक्टरो को लाने की योजना बना रही है पूरे उत्तराखंड राज्य मरे इस समय कुल 2852 पद है  जिसमे विशेषज्ञ और एमबीबीएस दोनों डॉक्टर शामिल है जिसमे पहाड़ी राज्यों के अधिकांश पद भर चुके है इसे में रकर ने मैदानी जिलों में ही पदों को भरना शुरू कर दिया है जिसके तहत पहाड़ों के लंबे समय से डॉकटोरो का तबादला करने का प्रयास किया जा रहा है जहा मैदानों मे 300 पद खाली है तो वही पहाड़ के चार जिलों में पदों से ज्यादा डॉक्टर है जिसमे पिथोरागढ़ 186 पद है लेकिन जिले में डॉक्टरो की संख्या 199 है जिले में स्वीकृत  पद के अलावा 13 डॉक्टर ज्यादा कार्यरत है बागेश्वर में कुल 107 पद है लेकिन कार्यरत डॉक्टरो की संख्या 119 है हालांकि इनमे 15 डॉक्टर पिजी कर रहे है  चंपावत जिले में 111 पद है लेकिन 122 डॉक्टर कार्यरत है रुद्रप्रयाग में 102 डॉक्टरो के पद है लेकिन 110 डॉक्टर वह पर कार्यरत है इसी के साथ स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक पहाड़ों के अस्पतालों में 80 के करीब कार्यरत डॉक्टर इस समय  गायब है जिनके खिलाफ सीएमओ स्तर पर कार्यवाही चल रही है महानिदेशलय से रिपोर्ट आने के बाद शासन स्तर से कार्यवाही चलेगी उसके बाद ही पद खाली होंगे और नए डॉक्टर तैनात किए जाएंगे