चारधाम यात्रा पर सियासी रार

उत्तराखंड की प्रसिद्ध चारधाम यात्रा शुरू करने पर लगी रोक हटाने के लिए राज्य सरकार फिर हाईकोर्ट पहुंच गई है, सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका एसएलपी वापस लेने के बाद सरकार का पूरा जोर रोक हटाने पर है…ताकि यात्रा को शुरू किया जा सके, आपको बता दें कि उत्तराखण्ड में 2022 में विधनसभा चुनाव होने हैं जिसको लेकर राजनैतिक पार्टियां यात्राएं और रोडशो में लगी हैं, पिछले दिनों दिल्ली के सीएम अरविन्द केजरीवाल ने रोडशो कर ताकत दिखाई थी, ऐसे में चुनावी यात्राएं जारी हैं जबकि चारधाम यात्रा पर रोक लगी है जिसस हजारों लोगों की आजीविका पर ग्रहण लगा हुआ है ।

उत्तराखंड सरकार ने हाईकोर्ट से चारधाम यात्रा खोलने का अनुरोध किया है, कोर्ट ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश से पहले हाईकोर्ट यात्रा पर लगी रोक को नहीं हटा सकती है, बता दें कि हाईकोर्ट ने चारधाम यात्रा वाले जिलों में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी, कोविड संक्रमण रोकने के लिए पर्याप्त तैयारियां नहीं करने, डॉक्टरों की कमी तथा जिला प्रशासन की रिपोर्ट के आधार पर चारधाम यात्रा पर 28 जून को अग्रिम आदेशों तक रोक लगा दी थी, जिसके बाद विपक्ष लगातार ही सरकार को घेर रही थी..सरकार को गरिमा दसौनी ने घेरते हुए कहा कि भाजपा अपनी जन आशीर्वाद यात्रा का बिगुल फूक चुकी है., पर सरकार चारधाम यात्रा पर कुछ नहीं कर रही है, तो वहीं गुरुवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी नैनीताल में साफ कहा था कि यात्रा खोलने को लेकर सरकार हर मुमकिन कोशिश करेगी,

इस आदेश के खिलाफ छह जुलाई को प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की थी, महाधिवक्ता ने मुख्य न्यायाधीश आरएस चौहान एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष पेश होकर मौखिक तौर पर चारधाम यात्रा पर लगी रोक को हटाने का अनुरोध करते हुए कहा कि चार धाम यात्रा से हजारों लोगों की रोजी रोटी जुड़ी है, हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति आरएस चौहान की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष सरकार ने मौखिक रूप से रोक हटाने की याचना की है, कोर्ट ने सरकार की याचना को स्वीकार करते हुए 15 अथवा 16 सितंबर को मामले में सुनवाई का निर्णय लिया है ।

कोर्ट ने साफ किया कि जब तक मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है तो हाईकोर्ट रोक हटाने पर विचार कैसे कर सकती है, वही पर्यटन व्यवसाय से जुड़े संगठनों ने चारधाम यात्रा खोलने को लेकर उच्च न्यायालय से गुहार लगाई है