लापरवाह शिक्षकों के आगे नतमस्तक शिक्षा विभाग, शिकायत के बाद भी नहीं कोई कार्यवाही

एक तरफ केंद्र की मोदी सरकार और प्रदेश की योगी सरकार बेसिक शिक्षा में सुधार करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही हैं । ताकि परिषदीय स्कूलों में भी कॉन्वेंट स्कूलों की तर्ज पर पठन पाठन हो सके और परिषदीय स्कूलों के हालात में सुधार ही सके, लेकिन कुछ भ्रस्ट अध्यापकों और स्थानीय अधिकारियों की लापरवाही से शिक्षा में सुधार की सरकारी योजनाएं धरातल पर नहीं दिखाई दे रही हैं।

ताजा मामला शहाबगंज बीआरसी कार्यालय से सटे हुए गांव के प्राथमिक विद्यालय तकिया, महड़ौर का है जहां दिनांक 30 अप्रैल 2022 को प्रातः 10:00 बजे तक मात्र एक सहायक अध्यापक तथा एक शिक्षा मित्र उपस्थित मिले। प्रधानाध्यापक हरिओम सिंह और सहायक अध्यापक आज़ाद गैर हाजिर थे। स्कूल के ही एक कमरे में आंगनवाड़ी केन्द्र भी है जिसमें ताला लगा था और कुछ बच्चे बाहर खेलते मिले।

हमारे संवाददाता ने जब स्थानीय ग्रामवासियों से जानकारी प्राप्त की तो मालूम हुआ कि हरिओम सिंह सप्ताह में केवल एक या दो दिन ही विद्यालय आते हैं। उनको देख कर दूसरे अध्यापक भी लापरवाही करते हैं जब इच्छा हो घर बैठ जाते हैं। हरिओम सिंह की शुरू से ही यही आदत है और इसकी जानकारी विभाग को भी है।

ग्रामवासियों ने ये भी बताया कि उन्होंने बीआरसी कार्यालय जा कर कई बार लापरवाह अध्यापकों की मौखिक रूप से शिकायत भी की। जिसपर खण्ड शिक्षा अधिकारी ने कार्यवाही करने की बात करते हुए ग्रामीणों को अपना मोबाइल नम्बर भी दिये कि जब हरिओम सिंह या कोई भी शिक्षक विद्यालय न आये तो इस नम्बर पर सूचना दें। नम्बर तो दे दिए परन्तु फोन करने पर कभी फोन उठा ही नहीं।

विद्यालय के रखरखाव की भी दशा काफी दयनीय है। विद्यालय परिसर में न तो कोई शौचालय है न ही मूत्रालय, दिव्यांग छात्रों के लिए एक शौचालय का निर्माण ज़रूर हुआ है लेकिन उपयोग के लायक नहीं है। खण्ड शिक्षा अधिकारी के नाक के नीचे विद्यालय व शिक्षकों की ऐसी दशा और शिकायत मिलने के बाद भी खण्ड शिक्षा अधिकारी की उदासीनता के दो ही कारण हो सकते हैं, या तो किसी दबाव में हैं या फिर उनके संरक्षण में सारा गोरखधंधा चल रहा है।

वहीं विद्यालय जाने वाले रास्ते की बात करें तो दोपहिया वाहन द्वारा भी बड़ी कठिनाई से पहुंचा जा सकता है। रास्ते की स्थिति देख कर ऐसा लगता है कि बारिश हो जाने पर दोपहिया वाहन पहुंचना भी असंभव होगा। रास्ता खराब होने का फायदा भी अध्यापक उठाते हैं। चुकी खण्ड शिक्षाधिकारी कोई कार्यवाही करेंगे नहीं और बड़े अधिकारी आ नहीं सकते।

 

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