अपनों का सपना,हमारा उत्तराखंड

आज मसूरी गोलीकांड की 27वीं बरसी है.दो सितंबर का दिन मसूरी के इतिहास का काला दिन माना जाता है। दो सितंबर 1994 को राज्य आंदोलनकारियों पर पुलिस ने गोलियां चला दीं थी, जिसमें छह राज्यआंदोलनकारी शहीद हुए थे। आपको बता दें कि उत्तरप्रदेश से अलग राज्य निर्माण की मांग को लेकर एक सितंबर 1994 को खटीमा में सड़कों पर उतरे हजारों आंदोलनकारियों पर गोलियां बरसाई गई थी जिसके विरोध में मसूरी में जुलूस निकाला गया था जहां राज्य आंदोलनकारियों पर पुलिस ने गोलियां चला दीं थी इस घटना को भले ही 26 साल पूरे हो चुके हो लेकिन आज भी आंदोलनकारियों के सपनों का उत्तराखंड नहीं बन पाया राज्यआंदोलनकारियों के सपनों का उत्तराखंड हम अबतक नहीं बना पाए है

उत्तरप्रदेश से अलग राज्य निर्माण की मांग को लेकर राज्य आंदोलनकारियों की ओर से लड़ी गई लड़ाई के दौरान कई राज्यआंदोलनकारियों ने अपनी शहादत दी समतल विकास की अवधारणा को लेकर हुए इस आंदोलन में कई राज्य आंदोलनकारियों ने अपनी जान गंवाई.शहीदों की याद में हर साल मसूरी और खटीमा गोलीकांड की बरसी मनाई जाती है…इसी के तहत आज मसूरी गोलीकांड की 27वीं बरसी है.दो सितंबर का दिन मसूरी के इतिहास का काला दिन माना जाता है। इस घटना को भले ही 26 साल हो चुके हो लेकिन आज भी आंदोलनकारियों के सपनों का उत्तराखंड नहीं बन पाया राज्यआंदोलनकारियों का दर्द है कि आज भी स्थाई राजधानी, लोकायुक्त,भू कानून, राज्यआंदोलनकारियों के चिहिकरण समेत कई मांगें राज्य आंदोलनकारियों की अधूरी है

आपको बता दें कि राज्य गठन के बाद से लगातार एकाएक सभी दलों ने जनता से राज्य आंदोलनकारियों की भावनाओं के अनुरूप राज्य निर्माण का वादा किया था लेकिन समय बीत जाने के बाद आज भी राज्य आंदोलनकारी अपने सपनों के उत्तराखंड की तलाश कर रहे हैं

वहीं राज्य के विकास को लेकर सियासत भी गर्मा गई है.कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह का कहना है कि राज्य आंदोलनकारियों की मांगों को सिर्फ कांग्रेस ने पूरा किया है.साथ ही राज्य का विकास भी कांग्रेस ने किया है.जबकि आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता नवीन पिरसाली का कहना है कि बीजेपी कांग्रेस के नेताओं ने राज्य के विकास से ज्यादा खुद के विकास पर ज्यादा ध्यान दिया जिससे राज्य का विकास नहीं हो पाया

फाईनल वीओ- कुल मिलाकर राज्य आंदोलनकारियों के अनुरूप राज्य का विकास नहीं हो पाया इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता.हांलाकि सभी सरकारों ने प्रयास जरूर किया है.देखना होगा कि आखिर कब तक उत्तराखंड के राज्य आंदोलनकारियों के सपने सरकार साकार कर पाती है.क्या राज्य को अपनी स्थाई राजधानी मिल पाएगी.क्या भू कानून, लोकायुक्त, समेत तमाम मांगे सरकार आंदोलनकारियों की पूरा करेगी ऐसे अनगिनत सवाल है जिसके जवाब का सबको इंतजार है