एंडेमिक फेज में प्रवेश कर सकती है महामारी

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि भारत में कोरोना महामारी एक तरह से एंडेमिक फेज में प्रवेश कर सकती है। किसी महामारी के एंडेमिक फेज़ में प्रवेश करने का मतलब है कि अब वह इंफेक्शन हमेशा के लिए खत्म होने वाला नहीं है, हमें उसके साथ ही जीना पड़ेगा। लेकिन राहत की बात यह है कि कोरोना संक्रमण का खतरा अब सामान्य से लेकर मॉडेरेट तक रह सकता है। भारत में कुछ महीने पहले जितनी बड़ी संख्या में कोरोना के केस आ रहे थे, वैसा दोबारा होने के आसान नहीं हैं लेकिन भारत में कोरोना महामारी का फैलाव कितना होगा, यह जनसंख्या के वितरण और लोगों की प्रतिरोधक क्षमता से तय होगा। जिन इलाकों में लोगों का वैक्सीनेशन कम हुआ है, वहां अगले कुछ महीनों में इसके मामलों में बढ़ोतरी दिख सकती है।

वैक्सीन के बाद भी मास्क जरूरी
कोई महामारी उस समय एंडेमिक की हालत में पहुंच जाती है जब उसके पूरी तरह खत्म होने की संभावना नहीं रहती। ऐसे में लोगों को हमेशा के लिए उस इंफेक्शन के साथ ही जीना पड़ता है। एपिडेमिक यानी महामारी के विपरीत इस फेज में सभी लोगों को संक्रमण होने खतरा कम रहता है। आपको बता दें कि दूसरी लहर आने से पहले दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा था कि दिल्ली में कोरोना का फेज़ समाप्त हो रहा है और अब धीरे-धीरे हम फेज़ की तरफ बढ़ रहे हैं। जैन ने स्वाइन फ्लू का उदाहरण देते हुए कहा कि 10 साल पहले दिल्ली में स्वाइन फ्लू बड़ा खतरा था लेकिन अब हर साल कुछ ही मामले आते हैं। इसी तरह कोरोना पूरी तरह से जाने वाला नहीं है। हमें इसके साथ ही जीना होगा और लोगों को मास्क पहनना जारी रखना होगा। इस बीच उत्तर प्रदेश समेत अनेक राज्यों में स्कूल खुल गए हैं। कुछ स्कूलों में कोरोना के बड़े केस सामने आए हैं ।

रोगाणु पूरी तरह से समाप्त नहीं होते
पिछले कुछ दशकों में जितनी भी बीमारियों के रोगाणुओं ने लोगों को प्रभावित किया है अगर उसपर निगाह डाली जाए तो वे पूरी तरह से समाप्त नहीं हुए हैं बल्कि किसी न किसी रूप में मौजूद रहे हैं। इन्हें पूरी तरह से समाप्त करना असंभव है। मलेरिया जैसी बीमारियां मानव सभ्यता के विकास के साथ ही चली आ रही है और अभी भी मौजूद है। इसी प्रकार टीबी, खसरा, कुष्ठ रोग और इबोला वायरस, मेर्स, सार्स व सार्स-कोवी-2 (कोरोना) भी हैं. यहां तक कि प्लेग भी हर दशक में वापस लोगों को प्रभावित करती है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक सिर्फ स्मॉलपॉक्स ही है, जिसे बड़े पैमाने पर वैक्सीनेशन के जरिए समाप्त किया जा सका है।

हार्ड इम्युनिटी पाना संभव नहीं
इम्यूनोलॉजिस्ट योनाटन ग्रैड के मुताबिक कोरोना महामारी के एंडेमिक बनने का मतलब है कि पर्याप्त लोगों ने इसके प्रति प्रतिरोधी क्षमता विकसित कर लेंगे। उनके अंदर या तो वैक्सीनेशन के जरिए या संक्रमण के जरिए यह क्षमता विकसित होगी। इस प्रकार संक्रमण की दर में गिरावट आएगी। हालांकि डेल्टा वैरिएंट जैसे नए वैरिएंट्स के चलते अभी हार्ड इम्युनिटी पाना संभव नहीं लग रहा है।