Mann Ki Baat: भारत में बनी चीजों की दुनिया में डिमांड, एक्सपोर्ट में हासिल हुई उपलब्धि- पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’की. पीएम मोदी ने कार्यक्रम में भारत में बनी चीजों की दुनिया में डिमांड, एक्सपोर्ट में हासिल की उपलब्धि पर बात की. प्रधानमंत्री पीएम मोदी का रेडियो संबोधन हर महीने के आखिरी रविवार को होता है. इस रेडियो कार्यक्रम की यह 87वीं कड़ी है.

दुनिया में भारतीय सामानों की मांग बढ़ रही- पीएम

पीएम ने अपने कार्यक्रम में कहा कि हमारा देश ने 30 लाख करोड़ का निर्यात किया है जो कि ऐतिहासिक है. उन्होंने कहा कि भारत ने 400 अरब डॉलर के निर्यात का लक्ष्य हासिल कर लिया है. यह भारत की क्षमताओं को दर्शाता है. पीएम मोदी ने कहा कि एक समय में भारत से एक्सपोर्ट का आंकड़ा कभी 100 बिलियन, कभी डेढ़ सौ बिलियन तक हुआ करता था, आज भारत 400 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है. जिसका साफ मतलब ये है कि भारत में बने सामानों का डिमांड बढ़ रहा है. 

पीएम ने बाबा शिवानंद का किया जिक्र

उन्होंने आगे कहा कि हाल ही में संपन्न हुए पद्म पुरस्कारों में आपने बाबा शिवानंद को देखा ही होगा, उनके जोश और फिटनेस को देखकर हर कोई हैरान था. उनका स्वास्थ्य देश में चर्चा का विषय है. उन्हें योग का शौक है. उन्होंने कहा कि हमने देखा होगा कि कतर के एक योग कार्यक्रम में 114 देशों ने भाग लेकर इतिहाक बना दिया. उन्होंने अपने संबोधन के दौरान स्टार्टअप वर्ल्ड का भी जिक्र किया. मन की बात में उन्होनें चंद्र किशोर पाटिल का जिक्र किया, उन्होंने कहा कि उनका स्वच्छता को लेकर किया गया काम सराहनीय है. वह गोदावरी नदी में लोगों को कचड़ा फेंकने से रोकते हैं. उन्होंने कहा कि पाटिल जी का ये काम लोगों के लिए प्रेरणा है.

पानी कंजरवेशन पर काफी कर रहे काम

पीएम ने संबोधन के दौरान कहा कि देश में बहुत से लोगों ने पानी कंजरवेशन पर काफी काम कर रहे हैं. उन्होंने महाराष्ट्र के रोहन का जिक्र करते हुए कहा कि वह महाराष्ट्र के सैकड़ों सीढ़ी वाले कुएं को साफ करने का अभियान चला रहे हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे ही कई लोग हैं जिन्होंने पानी के संरक्षण का काम किया है. पीएम मोदी ने कहा मैं उस राज्य से आता हू, जहां पानी की हमेशा बहुत कमी रही है. गुजरात में इन Stepwells को वाव कहते हैं.  गुजरात जैसे राज्य में वाव की बड़ी भूमिका रही है. इन कुओं या बावड़ियों के संरक्षण के लिए ‘जल मंदिर योजना’ ने बहुत बड़ी भूमिका निभाई है.