कोरोना की त्रासदी के बाद इस  फिल्म ने ओटीटी के बजाय सिनेमा हॉल का रास्ता चुना है.

कोरोना की त्रासदी के बाद निर्देशक रूमी जाफरी की चेहरे एक बड़ी स्टारकास्ट वाली भव्य बजट की वो फिल्म है, जिसने ओटीटी के बजाय सिनेमा हॉल का रास्ता चुना है। इस सस्पेंस-थ्रिलर-ड्रामा में निर्देशक रूमी जाफरी के पास महानायक अमिताभ बच्चन जैसा तुरुप का इक्का था

 ‘अगर आप में से किसी ने कोई अपराध या जुर्म किया है, तो बहुत संभल के यहां से गुजरिएगा, क्योंकि यह खेल आपके साथ भी खेला जा सकता है।’ फिल्म की कहानी इसी लाइन पर चलती है। रिटायर क्रिमिनल लॉयर लतीफ जैदी अपने रिटायर दोस्तों के साथ अक्सर एक खेल खेलता है, यह खेल किसी क्रिमिनल केस का मॉक ट्रायल होता है, जिसमें प्रॉसीक्यूशन के वकील के रूप में परमजीत सिंह भुल्लर (अन्नू कपूर) होता है,

महानायक अमिताभ बच्चन और इमरान हाशमी फिल्म का प्लस पॉइंट हैं। दोनों ही कलाकारों ने फिल्म को बांधे रखने का पूरा प्रयास किया है। मेगा स्टार बिग बी तो अपने हाव-भाव और संवाद अदायगी में बीस ही साबित होते हैं, मगर इमरान हाशमी भी उन जैसे कद्दावार अभिनेता के सामने कमतर साबित नहीं हुए हैं। हमारी न्याय प्रणाली पर फिल्म में बिग बी का अपनी बैरिटोन आवाज में 12-15 मिनट का एक लंबा मोनोलॉग है, जो आप इंडिविजुअली सुनेंगे,