तालिबान की तानाशाही – अब कोई अफगानी नहीं निकल पाएगा देश के बाहर

20 साल बाद अफगानिस्तान  में तालिबानियों का दोबारा कब्जा हो गया है . अफगानिस्तान में अपनी हुकूमत जमाने के बाद  तालिबान ने अपना असली चेहरा दिखाना शुरू कर दिया है . 15 अगस्त को तालिबान के काबुल पर कब्जा करते ही अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी देश छोड़कर भाग गये . अफगानिस्तानी नागरिकों समेत अन्य नागरिक भी अफगानिस्तान छोड़ने की कोशिश में लग गये. हर कोई किसी भी कीमत पर अफगानिस्तान से निकलना चाहता था . काबुल एयरपोर्ट पर हजारों लोग अपने अपने वतन लौटने को बेताब रहे . अब तक हजारों लोग अफगानिस्तान छोड़ चुके हैं. लेकिन अब किसी भी अफगानी नागरिक को अफगानिस्तान  छोड़ने की इजाजत नहीं है और तो और देश छोड़ चुके अफगानी नागरिक को भी वापस बुलाया जा रहा है . इसके पीछे कारण है तालिबान की ओर से दी गई चेतावनी . तालिबान  ने चेताया है कि अब वो किसी भी अफगानी को देश छोड़ने की इजाजत नहीं देगा. हालांकि, विदेशी नागरिक अपने देश लौट सकते हैं . उन्हें देश छोड़ने से रोका नहीं जाएगा .

Taliban's winning strategy was grounded in countryside, and culture - CSMonitor.com

देश छोड़कर जाने वाले अफगानों से खुश नहीं तालिबान

मंगलवार को मीडिया से मुखातिब होते हुए  तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने  कहा – “अब किसी भी अफगानी को देश छोड़ने की इजाजत नहीं होगी. हालांकि विदेशी नागरिक अपने देश लौट सकते हैं.” जबीउल्लाह मुजाहिद ने अफगानिस्तान छोड़ चुके अफगानियों को भी वापस देश लौटने का संदेश दिया है . तालिबान का कहना है कि अब अफगानों को देश छोड़ने नहीं दिया जाएगा और तालिबान इससे बिलकुल खुश नहीं हैं कि अफगानी देश छोड़कर जा रहे है . तालिबान का कहना है कि अफगानिस्तान के डॉक्टरों और शिक्षाविदों को देश नहीं छोड़ना चाहिए और अपने देश में ही रहकर काम करना चाहिए. जारकारी के अनुसार , एयरपोर्ट जाने वाली सड़क को अफगानियों के लिए ब्लॉक कर दिया गया है. कोई भी अफगानी उस सड़क से एयरपोर्ट नहीं जा सकेगा ,  लेकिन विदेशी नागरिकों को एयरपोर्ट जाने की इजाजत होगी और वो देश के बाहर भी जा सकते है.