Indian Stock Market: इस हफ्ते संभल कर करें शेयर बाजार में निवेश, जानें एक्सपर्ट्स ने क्या दी चेतावनी!

नई दिल्ली: इस हफ्ते शेयर बाजार में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है, इसका कारण आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की बैठक बताया जा रहा है। इस पर कंपनियों के तिमाही नतीजों का भी असर दिख सकता है, इसलिए अगर आप शेयर बाजार में निवेश करते हैं तो सोच-समझकर निवेश करें. विश्लेषकों का कहना है कि सप्ताह के दौरान बाजारों की दिशा आरबीआई की मौद्रिक समीक्षा और कुछ बड़ी कंपनियों के तिमाही नतीजों से तय होगी।

विश्लेषकों का कहना है कि घरेलू बाजार के निवेशकों की निगाह रुपये के उतार-चढ़ाव, ब्रेंट क्रूड के दाम और विदेशी संस्थागत निवेशकों के रुख पर भी रहेगी. रेलिगेयर ब्रोकिंग के उपाध्यक्ष (शोध) अजित मिश्रा का कहना है कि महत्वपूर्ण घटनाक्रमों के बीच बाजार भागीदारों की नजर इस सप्ताह एमपीसी की नीतिगत समीक्षा बैठक पर होगी. बैठक के नतीजें 9 फरवरी को आएंगे. इसके अलावा, वृहद आर्थिक मोर्चे पर 11 फरवरी को औद्योगिक उत्पादन (आईआईपी) के आंकड़े भी आने हैं।

बाजार में उम्मीदों के अनुरूप तेजी
जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख विनोद नायर का कहना है कि इस सप्ताह रिजर्व बैंक की नीतिगत बैठक घरेलू निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है. इस बैठक के नतीजे का सभी को इंतजार रहेगा. विश्लेषकों ने कहा कि पिछले सप्ताह के शुरुआती दिनों में बाजार में तेजी उम्मीदों के अनुरूप थी. बीते सप्ताह बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 1,444.59 अंक यानी 2.52 फीसदी चढ़ा था.

कई कंपनियों के आने है नतीजे-
उन्होंने कहा कि, सप्ताह के दौरान भारती एयरटेल, जिंदल स्टील, एसीसी, हीरो मोटोकॉर्प, टाटा पावर, हिंडाल्को और महिंद्रा एंड महिंद्रा सहित कई बड़ी कंपनियों के तिमाही नतीजे भी आने हैं. टीवीएस मोटर कंपनी, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, आईआरसीटीसी, एनएमडीसी और सेल भी अपने तिमाही नतीजों की घोषणा करेंगी. इसके अलावा, घरेलू बाजारों में दिख रहा भारी उतार-चढ़ाव वैश्विक रुझानों के अनुरूप है. यह निकट भविष्य में भी जारी रह सकता है.

कच्चा तेल बन सकता है चिंता का विषय-
स्वस्तिका इन्वेस्टमार्ट के शोध प्रमुख संतोष मीणा ने कहा कि, इस सप्ताह घरेलू संकेतक बाजार को दिशा देंगे. सबकी नजरें 9 फरवरी को आरबीआई की एमपीसी बैठक के नतीजों पर रहेगी. वैश्विक संकेतक भी स्पष्ट नहीं हैं. भू-राजनीतिक स्थिति महत्वपूर्ण है, जबकि कच्चे तेल के दाम बढ़ना हमारे लिए चिंता का विषय है. विदेशी संस्थागत निवेशक अभी बिकवाली के मूड में हैं. उनका रुख भी बाजार को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।