नहीं रहीं ‘स्वर कोकिला’ लता मंगेशकर

मेरी आवाज ही पहचान है, यूं तो यह एक गाने के अल्फाज है  लेकिन लता दीदी के इस गाने से उनका पूरा जीवन नजरों के सामने आ जाता है। अपनी आवाज से देश और दुनिया में खास पहचान बनाने वाली लता मंगेश्कर आज हमारे बीच नहीं रही। करीब महीने भर से मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ती रही, लेकिन रविवार की सुबह 92 साल की उम्र में इस जंग को हार गई और अंतिम सांस ली। लता मंगेश्कर के निधन पर दो दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की गई है और पूरे सम्मान के साथ  अंतिम संस्कार किया जाएगा ।

लता मंगेश्कर का जन्म 28 सितंबर 1929 को मध्यप्रदेश  में हुआ

लता मंगेश्कर का जन्म 28 सितंबर 1929 को मध्यप्रदेश के इंदौर  शहर  में हुआ। उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर एक बेहद कुशल रंगमंचीय गायक थे, लेकिन मात्र 13 साल की उम्र में अपने पिता को खो दिया। पिता का साया सिर से उठा तो इन पर जैसे दुखों का पहाड टूट पड़ा भाई बहिनों में सबसे बड़ी होने के कारण पूरे परिवार की जिम्मेदारी इनके सिर पर आ गई, लेकिन तमाम संघर्षों को झेलते हुए लताजी ने हार नहीं मानी और पार्श्वगायिकी की दुनिया में कदम रखा, लता दीदी ने छोटी सी उम्र में काम करना शुरू किया। 5 साल की उम्र पहली बार एक नाटक में अभिनय करने का अवसर मिला। करियर की शुरूआत भले ही अभिनय से की हो । लेकिन बचपन से ही मन तो हमेशा से ही संगीत में रमा हुआ था।

लता मंगेश्कर के संगीत का सफर

लता मंगेश्कर ने अपने संगीत करियर में कई गाने गाए । लेकिन असल पहचान सन् 1947 में मिली जब फ़िल्म “आपकी सेवा में” उन्हें एक गीत गाने का मौका मिला। इसके बाद से कई फिल्मों में अपनी आवाज का जादू बिखेरने का मौका मिला ।  लता जी ने लगभग तीस से ज्यादा भाषाओं में 30,000 से अधिक गाने गाए हैं। अपनी शानदार प्रतिभा के कारण लता दीदी को भारत सरकार ने ‘भारतरत्न’ से सम्मानित किया है। इन्हे 6 फिल्म फेयर पुरस्कार 1969 में पद्म भूषण 1974 में  दुनिया में सबसे अधिक गीत गाने के लिए  गिनीज़ बुक रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराने का गौरव मिला । 1989 में दादा साहब फाल्के पुरस्कार मिला ।

लता मंगेश्कर के निधन पर तमाम लोगों ने अपनी संवेदनाएं जताई 

केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने ट्वीट किया और कहा, नितिन गडकरी देश की शान और संगीत जगत की शिरमोर स्वर कोकिला भारत रत्न लता मंगेशकर जी का निधन बहुत ही दुखद है।

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने ट्वीट किया -स्वर कोकिला’ लता मंगेशकर जी के निधन से भारत की आवाज़ खो गई है। उनके गाये हुए गीतों को भारत की कई पीढ़ियों ने सुना और गुनगुनाया है। उनका निधन देश की कला और संस्कृति जगत की बहुत बड़ी क्षति है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह  ने कहा – सुर व संगीत की पूरक लता दीदी ने अपने सुर से न सिर्फ भारत बल्कि पूरे विश्व में हर पीढ़ी के जीवन को भारतीय संगीत की मिठास से सराबोर किया। संगीत जगत में उनके योगदान को शब्दों में पिरोना संभव नहीं है। उनका निधन मेरे लिए व्यक्तिगत क्षति है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा – मैं शब्दों से परे पीड़ा में हूँ। दयालु और देखभाल करने वाली लता दीदी हमें छोड़कर चली गई हैं। वे हमारे देश में एक खालीपन छोड़ गई है, जिसे भरा नहीं जा सकता। आने वाली पीढ़ियां उन्हें भारतीय संस्कृति के एक दिग्गज के रूप में याद रखेंगी।

राष्ट्रपति रामनाथ कोंविद ने-  लिखा लता जी का निधन मेरे लिए हृदयविदारक है, जैसा कि दुनिया भर के लाखों लोगों के लिए है। उनके गीतों की विशाल श्रृंखला में, भारत के सार और सुंदरता को प्रस्तुत करते हुए, पीढ़ियों ने अपनी आंतरिक भावनाओं की अभिव्यक्ति पाई। उनकी उपलब्धियां अतुलनीय रहेंगी ।