यूपी विधानसभा चुनाव 2022: सपा प्रत्याशी व पूर्व मंत्री राममूर्ति वर्मा ने अधिकारियों को दी धमकी, कहा-‘सरकार बनते ही उनसे हिसाब होगा।’

अंबेडकरनगर: विधानसभा चुनाव में कुछ दिन ही शेष रह गए है। जिसके चलते राजनीतिक पार्टियों का प्रचार तेजी से बढ़ता जा रहा है। साथ ही पार्टियों के नेताओं, विधायकों, प्रत्याशियों द्वारा विपक्षी दलों पर लगातार हमलावर होते है। दरअसल, सपा के पूर्व मंत्री राममूर्ति वर्मा ने एक कार्यक्रम में अधिकारियों को धमकी देने की बात कह दी।

राममूर्ति वर्मा ने अंबेडकरनगर की टांडा विधानसभा सीट से सपा प्रत्याशी व पूर्व मंत्री ने अधिकारियों को सबक सिखाने की धमकी दी है। उन्होंने एक कार्यक्रम के दौरान मंच से कहा, ’10 मार्च के बाद भ्रष्ट अधिकारियों को आपके बीच खोजकर लाऊंगा। आप लोग ऐसे अधिकारियों का नाम नोट करके रख लीजिए। सरकार बनते ही उनसे हिसाब होगा।’

राममूर्ति ने कहा पुलिस, तहसीलदार, लेखपाल, बिजली विभाग के अधिकारी और कर्मचारी जिन्होंने बिजली चोरी के नाम पर लाखों की वसूली की है, उनका नाम आप लोग याद रखें और नोट करके रख लें। मेरे पिछले पांच सालों के कार्यकाल को याद रखे कि मैंने किस तरह से काम किया था। इस बार 10 मार्च के बाद ऐसे अधिकारी और कर्मचारी चाहें वो जिले की किसी भी तहसील में रहेंगे, उन्हें आपके बीच लाकर खड़ा कर दूंगा। उन्हें आपसे माफी मांगनी पड़ेगी और पैसा भी वापस करना पड़ेगा।

बता दें कि बीते मंगलवार को टांडा कस्बे में आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन में शामिल होने के लिए सपा प्रत्याशी राममूर्ति वर्मा पहुंचे थे। इस दौरान उनके भाषण का वीडियो बनाकर किसी ने वायरल कर दिया, जिसमें वह सरकार बनने के बाद अधिकारियों को सबक सिखाने की बात कह रहे हैं। राममूर्ति वर्मा समाजवादी पार्टी के लिए काफी लंबे समय से रहकर काम कर रहे हैं। साल 2012 में सपा से अकबरपुर विधानसभा से जीतकर पहली बार अखिलेश यादव की सरकार में मंत्री बने थे।

2022 के चुनाव से पहले बसपा से निष्कासित अकबरपुर विधायक एवं पूर्व मंत्री रामअचल राजभर के सपा में शामिल होने के बाद राममूर्ति वर्मा के टिकट को लेकर संशय की स्थिति उत्पन्न हो रही थी। हालांकि पार्टी उन्हें लगातार समायोजित करने के लिए आश्वासन दे रही थी। पहले तो राममूर्ति वर्मा के समर्थकों को लग रहा था पार्टी उन्हें अकबरपुर से ही उतारेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बीच में पार्टी उन्हें आजमगढ़ के सगड़ी विधानसभा से टिकट देने की बात कह रही थी, लेकिन राममूर्ति वर्मा ने जिले से बाहर चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया था। लेकिन अंत में पार्टी ने राममूर्ति की नाराजगी को दूर करने के लिए उन्हें टांडा से टिकट दे दिया।